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ब्रॉन्‍ज मेडल जीतने के बावजूद फूट-फूटकर रोईं पिंकी बलहारा, कहा - 'चोट के कारण बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकीं'

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:08 PM (IST)

भारत की कुराश खिलाड़ी पिंकी बलहारा अपने ब्रॉन्‍ज मेडल से खुश नहीं नजर आईं। वो सेमीफाइनल मैच के बाद फूट-फूटकर ...और पढ़ें

पिंकी बलहारा (Pic Credit - X)

पिंकी बलहारा (Pic Credit - X)

HighLights

  1. घुटने की चोट ने सेमीफाइनल में प्रदर्शन प्रभावित किया: पिंकी

  2. पिंकी ने कुराश में ब्रॉन्‍ज मेडल अपने नाम किया

  3. पिंकी ने कहा कि वो अपना सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन नहीं कर सकीं

प्रेट्र, नागोया। एशियाई खेलों में सोमवार को कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ी बनने वाली पिंकी बलहारा सेमीफाइनल मुकाबले के बाद फूट-फूटकर रो रही थीं और ये आंसू चोटिल घुटने के कारण बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाने की निराशा के थे।

भारत की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल पिंकी ने बताया कि दक्षिण कोरिया की लिम गारम के विरुद्ध क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान उनके दाएं घुटने पर चोट लगी थी। सेमीफाइनल में एक अन्य कोरियाई खिलाड़ी सुमिन मो के विरुद्ध मुकाबले में चोटिल घुटना उनके लिए परेशानी का सबब बना और वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकीं।

पिंकी ने क्‍या कहा

पिंकी ने कहा कि क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मुझे चोट लग गई थी। मेरे घुटने पर चोट लगी। क्वार्टर फाइनल में मेरी प्रतिद्वंद्वी भी कोरियाई थी। इसलिए सेमीफाइनल की मेरी प्रतिद्वंद्वी को पता था कि मेरे दाएं घुटने में चोट लगी है।

उन्होंने आंसुओं को रोकते हुए कहा कि मैं आक्रमण कर रही थी, लेकिन वह बार-बार मेरे घुटने पर हमला कर रही थी। इसलिए मैं पेनाल्टी के कारण हार गई।

कुराश के नियम

कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक कुश्ती और मार्शल आर्ट शैली है, जिसमें खिलाड़ियों को मुक्का मारने, लात चलाने या प्रतिद्वंद्वी के पैर पकड़ने की अनुमति नहीं होती। मुकाबले खड़े होकर होते हैं और अंक हासिल करने के लिए खिलाड़ी को प्रतिद्वंद्वी को पूरी ताकत और नियंत्रण के साथ पीठ के बल गिराना होता है।

पिंकी को इस कारण मिलती है मदद

दिल्ली की रहने वाली पिंकी ने 2018 एशियाई खेलों में 52 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीता था, लेकिन इस बार वह 78 किग्रा भार वर्ग में उतरीं। हांगझोउ एशियाई खेलों 2023 में उनका अभियान क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सका था। उन्होंने कहा कि 78 किग्रा वर्ग में यह मेरा सिर्फ दूसरा मुकाबला था।

इससे पहले मैंने मई में उज्बेकिस्तान में एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। 78 किग्रा में वह मेरा पहला मुकाबला था। पिंकी के प्रशिक्षण का ज्यादातर हिस्सा लड़कों के साथ मुकाबले करते हुए गुजरता है और उनका मानना है कि इससे उन्हें देश की सबसे सफल कुराश खिलाड़ियों में शामिल होने में मदद मिली।

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