पारुल चौधरी ने रचा इतिहास, 2 एशियन गेम्स में दो-दो मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला धावक
पारुल चौधरी ने एशियन गेम्स 2026 में दो मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। पारुल दो एशियन गेम्स में दो-दो मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला धावक बनीं।

पारुल चौधरी (Pic Credit- X)
HighLights
पारुल ने एशियन गेम्स 2026 में 5000 मीटर में जीता कांस्य
पिछले एशियन गेम्स में भी पारुल ने जीते थे दो मेडल
पारुल ने अपने ही नेशनल रिकॉर्ड को बेहतर किया
अमित तिवारी, जागरण मेरठ। लंबी दूरी की महिला धावक पारुल चौधरी ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया है। आईची नागोया में चल रहे एशियाई खेलों में सोमवार को 5000 मीटर दौड़ में पारुल ने 15:14.61 मिनट के समय के साथ कांस्य पदक जीता। रविवार को भी पारुल ने 3000 मीटर बाधा दौड़ में 9:08.67 मिनट के समय के साथ कांस्य जीता था।
उन्होंने अपना ही 9:12.46 मिनट का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 3.79 सेकंड बेहतर किया। इसके साथ ही वह लगातार दो एशियाई खेलों में दो-दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला धावक बन गईं। पारुल ने पिछले एशियाड में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 3000 मीटर बाधा दौड़ में रजत पदक जीता था।
पहले लोग पिता पर मारते थे ताने
15 अप्रैल 1995 को गांव इकलौता में किसान परिवार में जन्मीं पारुल का सफर बेहद साधारण परिस्थितियों से शुरू हुआ। स्कूल के दिनों में पारुल ने नंगे पैर दौड़कर अभ्यास किया। पारुल के पिता कृष्णपाल बताते हैं कि पारुल को बचपन से दौड़ने का शौक था।
जब वह तड़के चार बजे पगडंडियों पर दौड़ लगाती थी तो कुछ लोग कृष्णपाल पर व्यंग्य कसते हुए कहते थे-'क्या बेटियों को फौज में भर्ती कराएगा, जो उन्हें दौड़ा रहा है।' पिता ये ताने सुनकर चुप रह जाते, लेकिन बेटी लगातार दौड़ती रही।
पारुल का मेडल से जवाब
आखिरकार, गांव की मिट्टी से निकली पारुल ने पदक जीतकर न सिर्फ देश का मान बढ़ाया बल्कि उन तानों का जवाब भी दे दिया, जिन्हें बेटी का दौड़ना शर्मनाक लगता था, आज वही उनकी उपलब्धि पर नाज कर रहे हैं। पारुल की दोहरी उपलब्धि से उनके गांव से लेकर शहर के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम के धावकों में खुशी है।
