हाइलो ओपन चैंपियन बनने के बाद पीवी सिंधू का बड़ा खुलासा, बताया खिताब जीतने का राज
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने हाइलो ओपन खिताब जीतने के बाद अपनी तैयारी, रणनीति और फिटनेस ...और पढ़ें

पीवी सिंधू

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
शेखर झा, जागरण, नई दिल्ली। दो बार की ओलिंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने हाइलो ओपन में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने डेनमार्क की लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ड को सीधे गेम में हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। यह मौजूदा सत्र में सिंधू का दूसरा खिताब है।
खिताब जीतने के बाद सिंधू ने दैनिक जागरण से बातचीत में अपनी तैयारी, रणनीति और फिटनेस को लेकर विस्तार से चर्चा की।सिंधू ने कहा कि एशियाई खेलों के बाद उन्हें हाइलो ओपन की तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिला था। हालांकि, एशियाई खेलों से पहले किए गए अभ्यास और ट्रेनिंग का उन्हें काफी फायदा मिला।
कोच ने तैयारी में अहम भूमिका निभाई: सिंधू
उन्होंने कहा कि उनके कोच ने तैयारी में अहम भूमिका निभाई। कई बार मुकाबले एक घंटे से भी ज्यादा समय तक चलते हैं। ऐसे मैचों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ धैर्य बनाए रखना भी जरूरी होता है। इसलिए हमने कोर्ट पर उसी के अनुसार अभ्यास और ट्रेनिंग सत्र किए। कोच ने भी मेरे लिए उसी हिसाब से ट्रेनिंग शेड्यूल तैयार किया था।
सिंधू ने कहा कि तैयारी के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान आत्मविश्वास बनाए रखने और खेल में गलतियों को कम करने पर दिया गया। उन्होंने कहा कि कोर्ट पर उतरते समय वह खुद को लगातार याद दिलाती थीं कि शटल को कोर्ट के अंदर रखना है, धैर्य के साथ खेलना है और अनावश्यक गलतियों से बचना है। उनके कोच भी अभ्यास के दौरान इन बातों पर विशेष जोर देते थे। आगे उन्होंने कहा कि हर रात प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के खेल का वीडियो विश्लेषण किया जाता था। इसमें उनके खेलने के तरीके, कमजोरियों और गलतियों को समझने की कोशिश होती थी।
वीडियो विश्लेषण के बाद बनाई रणनीति
सिंधू ने कहा कि मैं लगभग सभी प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध कई बार खेल चुकी हूं। इसलिए हम उनके खेल को अच्छी तरह जानते हैं। वीडियो विश्लेषण के बाद कोच के साथ बैठकर रणनीति बनाई जाती थी। मुकाबले के दौरान अगर प्लान-ए काम नहीं करता था तो हम प्लान-बी के अनुसार खेलते थे। सिंधू ने कहा कि उनकी तैयारी का मुख्य उद्देश्य धैर्य बनाए रखना और अनफोर्स्ड एरर कम करना था। कोच उन्हें हमेशा आत्मविश्वास के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ देने और अपनी रणनीति पर भरोसा रखने की सलाह देते थे।
15 अंकों के नए स्कोरिंग सिस्टम पर सिंधू ने कहा यह बदलाव खिलाड़ियों के लिए नई चुनौती लेकर आएगा। सभी खिलाड़ियों को इसके अनुसार अपनी ट्रेनिंग और खेल की रणनीति में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी कई वर्षों से 21 अंकों के प्रारूप में खेल रहे हैं। इसलिए नए सिस्टम के अनुकूल होने के लिए विशेष अभ्यास की जरूरत होगी।
रिकवरी खिलाड़ी के प्रदर्शन का अहम हिस्सा
टेंपल उपकरण के प्रयोग पर बात करते हुए सिंधू ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के प्रदर्शन में रिकवरी की बड़ी भूमिका होती है। नींद, हृदय गति परिवर्तनशीलता (एचआरवी) और मानसिक प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े खिलाड़ियों को अपने शरीर की स्थिति समझने में मदद कर सकते हैं।
भारतीय कप्तान शुभमन गिल के टेंपल उपकरण के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर सिंधू ने कहा कि उन्हें यकीन है कि गिल को भी अपनी फिटनेस और रिकवरी से जुड़ी कुछ चीजों पर ध्यान देना होता होगा। उनके खेल में भी रिकवरी एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसका हर खिलाड़ी को ध्यान रखना चाहिए। जब आप अपने शरीर से जुड़े आंकड़ों को देखते हैं तो यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर की स्थिति कैसी है, रिकवरी कितनी अच्छी हो रही है और नींद का स्तर कैसा है।
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