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सीमा पर मां ने नहीं आने दी आंच, पिता के जाने के बाद निभाई हर जिम्मेदारी; बेटी के लिए तुड़वा दी एफडी

By Suresh ThakurEdited By: Abhishek Upadhyay
Published: Thu, 24 Sep 2026 10:26 PM (IST)

चंबा की सीमा ने एशियाई खेलों में 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। यह ...और पढ़ें

सीमा ने रचा इतिहास

सीमा ने रचा इतिहास

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सुरेश ठाकुर, जागरण, चंबा: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव की एक मां खेत में घास काट रही थी। उसे यह भी याद नहीं था कि उसकी बेटी सीमा जापान के आइची नागोया में एशियाई खेलों की 10,000 मीटर दौड़ में भाग ले रही है। सांझ होते ही उसे याद आया कि आज उसकी बेटी की ऐतिहासिक दौड़ है। उसने काम छोड़कर घर पहुंचकर बेटे से टीवी चलवाने को कहा। जब सीमा दौड़ती दिखाई दी, तो मां केसरी देवी की आंखों में आंसू आ गए।

उन्होंने देवी से प्रार्थना की कि उनकी बेटी जीत जाए। सीमा ने तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक जीता, जिससे मां की आंखों में आंसू थे, यह वर्षों की मेहनत का फल था। सीमा की इस जीत से गांव और प्रदेश में खुशी की लहर है।

पिता का उठा साया

केसरी देवी ने बताया कि जब सीमा सातवीं कक्षा में थी, तब उसने खेल को करियर बनाने का निर्णय लिया। बेहतर प्रशिक्षण के लिए वह धर्मशाला साई छात्रावास गई। 2012 में सीमा के पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी मां पर आ गई। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटी का हौसला नहीं टूटने दिया।

तुड़वाई एफडी

2017 में एशियन यूथ चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए मां ने अपनी एफडी तुड़वाई। अब सीमा को पूरा देश जानने लगा है। वह बैंक में क्लर्क के रूप में काम कर रही हैं, लेकिन उनकी मेहनत ट्रैक पर जारी है। यह सफलता केवल एक पदक नहीं, बल्कि मां के त्याग और बेटी के संघर्ष की जीत है।

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