कटक हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद बढ़ी चिंता, एक्सपर्ट बोले-अस्पतालों में मजबूत हो फायर सेफ्टी सिस्टम
कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भीषण अग्निकांड से 10 मरीजों की मौत के बाद अस्पतालों की सुरक्षा पर ...और पढ़ें

कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगी आग। (जागरण)
HighLights
एससीबी अग्निकांड में 10 मरीजों की मौत से चिंता।
विशेषज्ञों ने अस्पतालों में मजबूत फायर सेफ्टी मांगी।
नियमित जांच, आपातकालीन टीम और स्टाफ जरूरी।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड में 10 मरीजों की मौत के बाद अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि समय रहते अग्नि सुरक्षा और बिजली व्यवस्था की नियमित जांच होती, तो इस तरह की घटना को टाला जा सकता था। विशेषज्ञों ने अस्पतालों में सख्त निगरानी और मजबूत आपातकालीन व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
रोकथाम पर जोर, दोषारोपण से बचने की सलाह
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अब सबसे ज्यादा जरूरत सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की है। नियमित बिजली जांच, आपातकालीन दल का गठन और रात के समय पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए।
डॉ. पूर्णचंद्र मोहापात्रा ने कहा कि आग की अधिकतर घटनाएं शॉर्ट सर्किट के कारण होती हैं, खासकर एयर कंडीशनर यूनिट में खराबी से खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में स्थायी इमरजेंसी स्क्वाड होना चाहिए। बिजली टीम को नियमित निरीक्षण करना चाहिए। ऐसी घटनाओं के कारणों की पहचान जरूरी है, ताकि भविष्य में इन्हें रोका जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समय दोष देने के बजाय तैयारी सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। गड़बड़ी या लापरवाही हो सकती है, लेकिन अभी जरूरी है कि हम भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाएं। रात के समय भी पर्याप्त स्टाफ और इमरजेंसी टीम मौजूद रहनी चाहिए।
ट्रॉमा आईसीयू में लगी थी आग
यह हादसा सोमवार तड़के एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ट्रॉमा केयर आईसीयू में हुआ। उस समय वहां 23 मरीज भर्ती थे। आग लगने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करना शुरू किया।
मरीजों को हटाने की प्रक्रिया के दौरान 10 मरीजों की मौत हो गई, जिससे आपातकालीन व्यवस्था और निकासी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सुरक्षा सिस्टम की समीक्षा की मांग
इस घटना के बाद विशेषज्ञों ने कहा कि अस्पतालों, खासकर आईसीयू जैसे संवेदनशील वार्डों में अग्नि सुरक्षा प्रणाली की पूरी समीक्षा होनी चाहिए।
उनका कहना है कि बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल, बिजली व्यवस्था की लगातार निगरानी और प्रशिक्षित आपातकालीन टीम ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकती है।
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