गांव तक नहीं पहुंच पाई एंबुलेंस, प्रसूता को स्ट्रेचर पर ढोकर ले जाना पड़ा; ओडिशा में खुली विकास के दावों की पोल
ओडिशा के रायगड़ा जिले में सड़क न होने के कारण एक प्रसूता को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ढोना पड़ा।
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महिला को लेकर जाते कर्मचारी। फोटो जागरण
HighLights
सड़क न होने से एंबुलेंस प्रसूता तक नहीं पहुंच पाई।
एंबुलेंस कर्मियों ने महिला को एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ढोया।
खनिज समृद्ध काशीपुर में बुनियादी सड़क सुविधाओं का गंभीर अभाव।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में सरकार बदलने के बाद विकास की नई उम्मीदें जगी थीं। चुनाव से पहले जनता से बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के कई वादे भी किए गए थे, लेकिन सरकार के ढाई साल बीतने के बावजूद दूरदराज के गांवों की तस्वीर बदलती नजर नहीं आ रही है।
इसकी बानगी रायगड़ा जिले के काशीपुर ब्लाक में देखने को मिली, जहां गांव तक सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस एक प्रसूता तक नहीं पहुंच सकी।
प्रसव के बाद गंभीर हालत में महिला को एंबुलेंस के कर्मचारियों ने करीब एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ढोकर सरमबाई स्कूल पहुंचाया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महिला और नवजात दोनों स्वस्थ हैं।
प्रसव के बाद बिगड़ी महिला की हालत
काशीपुर ब्लाक की शुंगेर पंचायत के सरमबाई गांव में एक महिला ने पुत्र को जन्म दिया था। प्रसव के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। परिजनों को तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाने की जरूरत महसूस हुई।
सूचना मिलने पर काशीपुर से 108 एंबुलेंस रवाना की गई, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण वाहन वहां तक नहीं पहुंच सका।
ऐसी स्थिति में एंबुलेंस चालक परीक्षित नायक, हेल्पर अविराम नायक और फार्मासिस्ट बिंदु सागर बाग ने जिम्मेदारी संभाली। तीनों ने स्ट्रेचर की मदद से महिला को करीब एक किलोमीटर तक ढोया और सरमबाई स्कूल तक पहुंचाया। वहां से उसे काशीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर भर्ती कराया गया।
खनिज संपदा से समृद्ध, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव
काशीपुर ब्लाक खनिज संपदा के लिहाज से रायगड़ा जिले के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में शामिल है। यहां से बड़े पैमाने पर खनिज राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव चिंता का विषय है। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण क्षेत्र के लोगों को आज भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान ऐसी स्थिति मरीजों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
डीएमएफ में 200 करोड़ रुपये से अधिक जमा
सबसे बड़ा सवाल जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की राशि के उपयोग को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, काशीपुर ब्लाक के लिए खनिज निधि में 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।
इसके बावजूद पिछले दो वर्षों में इस निधि का समुचित उपयोग नहीं हो पाया है। इससे पहले 75 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बाद भी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
खनिज संपदा से सरकार को राजस्व देने वाले इस क्षेत्र में यदि आज भी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए एक किलोमीटर तक स्ट्रेचर पर ढोना पड़े, तो विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना यह है कि प्रशासन जमा खनिज निधि का उपयोग कर सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कब ठोस कदम उठाता है।
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