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बॉक्साइट सप्लाई पर वेदांता का दावा खारिज, ओडिशा हाईकोर्ट ने 2015 का फैसला रखा बरकरार

Published: Fri, 02 Oct 2026 12:08 PM (IST)

वेदांता लिमिटेड को ओडिशा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जिसने बॉक्साइट आपूर्ति को लेकर ओएमसी के साथ उसके दो दशक पुराने संयुक्त उपक्रम संबंधी याचिका खारिज कर दी है।

ओडिशा हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

ओडिशा हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने वेदांता की बॉक्साइट आपूर्ति याचिका खारिज की।

  2. ओएमसी द्वारा 2015 में संयुक्त उपक्रम समाप्ति वैध मानी।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में बॉक्साइट आपूर्ति को लेकर वेदांता लिमिटेड और ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) के बीच दो दशक से अधिक पुराने विवाद में वेदांता को बड़ा झटका लगा है।

ओडिशा हाईकोर्ट ने वेदांता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने वर्ष 2004 के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) समझौते के आधार पर बॉक्साइट आपूर्ति और उससे जुड़े अधिकारों का दावा किया था। अदालत ने ओएमसी द्वारा वर्ष 2015 में संयुक्त उपक्रम समाप्त करने के फैसले को भी बरकरार रखा है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वर्ष 2015 में संयुक्त उपक्रम समाप्त करने के निर्णय को समय रहते कानूनी चुनौती नहीं दी गई थी। ऐसे में वह निर्णय अंतिम रूप से प्रभावी हो चुका है और इतने वर्षों बाद समाप्त हो चुकी व्यवस्था को पुनर्जीवित कर उसके आधार पर अधिकारों का दावा नहीं किया जा सकता।

मामले की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी, जब ओएमसी और वेदांता के बीच संयुक्त खनन परियोजना को लेकर समझौता हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य वेदांता की एल्यूमीनियम परियोजना के लिए बॉक्साइट की आपूर्ति सुनिश्चित करना था।

वेदांता का दावा था कि उसने इसी समझौते और तत्कालीन सरकारी आश्वासनों के आधार पर ओडिशा में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया। इसलिए कंपनी का कहना था कि बॉक्साइट आपूर्ति और मूल्य निर्धारण से जुड़े उसके अधिकार अब भी सुरक्षित रहने चाहिए।

दूसरी ओर, ओएमसी ने अदालत को बताया कि वेदांता समझौते की शर्तों और दायित्वों को पूरा करने में विफल रही थी। इसी कारण सितंबर 2015 में संयुक्त उपक्रम को समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। समाप्ति से जुड़े दस्तावेजों में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि संयुक्त उपक्रम खत्म हो चुका है।

सुनवाई के दौरान वेदांता ने ‘प्रॉमिसरी एस्टॉपल’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए तर्क दिया कि सरकार और ओएमसी के आश्वासनों पर भरोसा कर कंपनी ने बड़े पैमाने पर निवेश किया था, इसलिए बाद में उन प्रतिबद्धताओं से पीछे हटना उचित नहीं है।

हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि पिछले वर्षों में खनन कानूनों, नियमों और सरकारी नीतियों में व्यापक बदलाव हुए हैं। ऐसी स्थिति में पुराने समझौते के आधार पर वर्तमान में अधिकारों का दावा नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के इस फैसले को ओडिशा के खनन और एल्यूमीनियम क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि वर्ष 2015 में समाप्त किए गए संयुक्त उपक्रम के आधार पर वेदांता अब बॉक्साइट आपूर्ति या उससे जुड़े विशेष अधिकारों का दावा नहीं कर सकेगी।

साथ ही यह फैसला राज्य में खनिज संसाधनों के आवंटन और खनन परियोजनाओं से जुड़े भविष्य के मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर के रूप में देखा जा रहा है। 

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