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हॉकी इंडिया के चुनाव पर ओडिशा हाईकोर्ट की रोक, सदस्यता घटाने के नोटिस पर भी लगी रोक

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:21 PM (IST)

ओडिशा हाईकोर्ट ने हॉकी इंडिया के आगामी कार्यकारी समिति के चुनाव और हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा (HAO) की सदस्यता घटाने के नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी है।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. हॉकी इंडिया के कार्यकारी समिति चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक।

  2. ओडिशा हॉकी संघ की सदस्यता घटाने का नोटिस भी स्थगित।

  3. हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति का कार्यकाल समाप्त होने का तर्क।

संवाद सहयोगी, कटक। हॉकी इंडिया को बड़ा झटका देते हुए ओडिशा हाईकोर्ट ने उसके आगामी कार्यकारी समिति के चुनाव पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा (एचएओ) को स्थायी सदस्य से सहयोगी सदस्य बनाने के लिए जारी कारण बताओ नोटिस के क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस आर.के पटनायक की एकल पीठ ने शुक्रवार को हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा की ओर से दायर रिट याचिका (डब्ल्यूपी (सी) संख्या 36939/2026) पर विशेष सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया।

अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस, इसके बाद जारी अन्य नोटिस और हॉकी इंडिया की 119वीं तथा 120वीं कार्यकारी बोर्ड बैठक में अनुमोदित चुनाव कार्यक्रम पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.के रथ और आर.पी कर ने अदालत में दलील दी कि, कारण बताओ नोटिस जारी करने और उसके आधार पर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की कार्रवाई पूरी तरह अवैध तथा कानून के विरुद्ध है।

वहीं, ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता बी.पी नायक के साथ राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि, नोटिस जारी करने वाली कार्यकारी समिति के पास ऐसा करने का वैधानिक अधिकार नहीं था, क्योंकि हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति का कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो चुका था।

महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि, राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के तहत जिला और राज्य खेल संघों को निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप लाने की प्रक्रिया जारी रहने के दौरान ओडिशा हॉकी संघ की सदस्यता घटाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने भारतीय हॉकी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में ओडिशा सरकार के महत्वपूर्ण योगदान, निवेश और लंबे समय से चले आ रहे प्रायोजन समझौतों का भी हवाला दिया।

अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए विशेष रूप से प्रतिवादी संख्या छह से जवाब मांगा है। सभी पक्षों को सात दिनों के भीतर स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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