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JSW स्टील को ओडिशा हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ₹2169 करोड़ की खनन मांग पर फैसला

Published: Mon, 19 Oct 2026 08:52 AM (IST)

ओडिशा हाई कोर्ट ने जेएसडब्ल्यू स्टील को बड़ी राहत देते हुए ₹696.32 करोड़ की खनन मांग को रद्द कर दिया ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

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HighLights

  1. ओडिशा हाई कोर्ट ने जेएसडब्ल्यू स्टील को राहत दी।

  2. ₹696.32 करोड़ की खनन मांग को रद्द किया गया।

  3. ₹1,472.69 करोड़ की मांग पर पुनर्विचार का आदेश।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा हाई कोर्ट ने जेएसडब्ल्यू स्टील को बड़ी राहत देते हुए जाजंग लौह अयस्क खदान से संबंधित 696.32 करोड़ रुपये की मांग को रद कर दिया है।

वहीं, 1,472.69 करोड़ रुपये की एक अन्य मांग को निरस्त करते हुए मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए खनन अधिकारियों के पास वापस भेज दिया है।

हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर, 2026 को कंपनी की ओर से दायर दो याचिकाओं पर ये फैसले सुनाए। दोनों मामले ओडिशा के जोड़ा स्थित खनन अधिकारियों की ओर से जारी मांग नोटिस से संबंधित थे। कंपनी ने रविवार को नियामकीय सूचना के माध्यम से इन फैसलों की जानकारी दी।

वित्तीय वर्ष 2020-21 से जुड़े मामले में 696 करोड़ की मांग रद

पहला मामला जाजंग लौह अयस्क खदान के लिए खदान विकास एवं उत्पादन समझौते (एमडीपीए) के शुरुआती वर्ष में खनिज परिवहन में कथित कमी से संबंधित था। यह अवधि 27 जून, 2020 से 26 जून, 2021 तक थी।

इस दौरान खनिज परिवहन में आकलित कमी के आधार पर जोड़ा के संयुक्त खान निदेशक ने सितंबर 2021 में कंपनी को 696.32 करोड़ रुपये जमा करने का मांग नोटिस जारी किया था।

हाई कोर्ट ने इस मामले का निपटारा 20 अप्रैल, 2026 को सुनाए गए अपने पूर्व फैसले और उससे संबंधित अन्य याचिकाओं में दिए गए निर्देशों के अनुरूप किया।

जेएसडब्ल्यू स्टील के अनुसार, अदालत के निष्कर्षों और निर्देशों के आधार पर छह सितंबर, 2021 को जारी मांग पत्र तथा सात सितंबर, 2021 को जारी उसके संशोधन पत्र को रद माना गया है।

1,472 करोड़ रुपये के मामले में नए सिरे से होगा आकलन

दूसरा मामला खदान विकास एवं उत्पादन समझौते के पांचवें वर्ष में खनिज परिवहन में कथित कमी से जुड़ा है। यह अवधि 27 जून, 2024 से 26 जून, 2025 तक थी।

इस संबंध में जोड़ा के उपनिदेशक, खान ने 21 अगस्त, 2025 को 1,472.69 करोड़ रुपये की मांग का नोटिस जारी किया था।

यह मांग खनिज (परमाणु एवं हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों को छोड़कर) रियायत नियम, 2016 के नियम 12-ए के तहत की गई थी। हाई कोर्ट ने इस मांग को निरस्त करते हुए मामले को संबंधित प्राधिकारी के पास नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया है।

प्राधिकारी को 20 अप्रैल, 2026 के हाई कोर्ट के फैसले में स्पष्ट की गई कानूनी स्थिति के अनुरूप मामले का दोबारा आकलन करना होगा।

दोनों नोटिसों को कंपनी ने दी थी चुनौती

जेएसडब्ल्यू स्टील ने दोनों मांग नोटिसों को रद करने सहित अन्य राहतों के लिए हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। ताजा फैसले से वित्तीय वर्ष 2020-21 से जुड़े मामले में कंपनी को राहत मिली है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 से संबंधित मामले में खनन अधिकारियों को नए सिरे से विचार करना होगा।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसलों की जांच और उनके प्रभाव का आकलन करने में अतिरिक्त समय लगने के कारण नियामकीय सूचना जारी करने में देरी हुई।

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