ओडिशा पुलिस SI भर्ती परीक्षा पेपर लीक: 30 लाख में बिके थे प्रश्नपत्र, ईडी ने बढ़ाई जांच का दायरा; जल्द होगी अवैध संपत्तियों की जब्ती
प्रवर्तन निदेशालय ने ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में जांच का दायरा बढ़ाया है, जिसमें ओडिशा पुलिस ...और पढ़ें

14 अक्टूबर को जारी आधिकारिक बयान में ईडी ने स्पष्ट किया था कि जांच एजेंसियों की पहुंच से अब तक दूर रहीं कुछ संस्थाओं की संदिग्ध भूमिका सामने आई है।
HighLights
ईडी को OPRB अधिकारियों, निजी कंपनियों की संलिप्तता के सुराग मिले।
अवैध संपत्तियों की पहचान कर PMLA के तहत होगी जब्ती।
जासं, भुवनेश्वर। ओडिशा में वर्ष 2024 की पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हाथ एक अहम सफलता लगी है।
जांच के दौरान ईडी को ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) के कुछ अधिकारियों और कई निजी कंपनियों की संलिप्तता से जुड़े ठोस और महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
खास बात यह है कि ये अधिकारी और कंपनियां अब तक इस जांच के दायरे से बाहर थीं। ईडी अब इन नए तथ्यों के आधार पर मामले की गहराई से पड़ताल कर रहा है।
इसके साथ ही कथित अपराध से अर्जित अवैध धन के लेन-देन और उससे बनाई गई संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ऐसी अवैध संपत्तियों को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जा सकती है।
एक दर्जन ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
पिछले सप्ताह ही ईडी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में करीब एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।
इन छापों में परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रमुख निजी कंपनियां- सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल), पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और पीएसआइएल इंटरनेशनल लिमिटेड के ठिकाने शामिल थे।
अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में मिले नए साक्ष्यों और जानकारियों के बाद जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। 14 अक्टूबर को जारी आधिकारिक बयान में ईडी ने स्पष्ट किया था कि जांच एजेंसियों की पहुंच से अब तक दूर रहीं कुछ संस्थाओं की संदिग्ध भूमिका सामने आई है।
छापेमारी के दौरान ओपीआरबी से जुड़े कुछ खास लोगों की भी इस रैकेट में संभावित संलिप्तता के मजबूत संकेत मिले हैं।
निजी फर्मों और उपक्रमों की कार्यप्रणाली पर सवाल
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) ने परीक्षा आयोजित करने की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम आईटीआई लिमिटेड को सौंपी थी।
इसके बाद आईटीआई लिमिटेड ने यह काम भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) को दे दिया।
ईडी का आरोप है कि एसटीपीएल के निदेशक एससी नायक ने आईटीआई लिमिटेड की लिखित अनुमति या सहमति के बिना ही अभ्यर्थियों की बेहद संवेदनशील जानकारी पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी को सौंप दी।
आरोप है कि सिलिकॉन टेकलैब से जुड़े लोगों और पंचसॉफ्ट के निदेशक शंकर पुष्टि ने अभ्यर्थियों से सीधा संपर्क साधा। उन्होंने मोटी रकम के बदले परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का लालच देकर कई उम्मीदवारों को अपने जाल में फंसाया।
इसके अलावा, पीएसआइएल इंटरनेशनल लिमिटेड नामक कंपनी ने एसटीपीएल में नियंत्रक हिस्सेदारी (कंट्रोलिंग स्टेक) और बहुमत शेयर अपने हाथ में ले लिए, लेकिन इस बड़े प्रशासनिक बदलाव की भनक तक आईटीआई लिमिटेड को नहीं दी गई।
इसके बावजूद एससी नायक एसटीपीएल के निदेशक पद पर बने रहे और उन्होंने कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।
आंध्र प्रदेश में पकड़ी गई थीं तीन बसें
ईडी की यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच मुख्य रूप से ओडिशा पुलिस द्वारा सितंबर 2025 में दर्ज की गई प्राथमिकी पर आधारित है। उस समय पुलिस ने ओडिशा-आंध्र प्रदेश सीमा के पास इच्छापुरम के नजदीक तीन संदिग्ध बसों को पकड़ा था।
इन बसों में परीक्षा देने जा रहे कुल 114 अभ्यर्थी सवार थे। जांच में सामने आया कि इन अभ्यर्थियों को पांच और छह अक्टूबर 2025 को होने वाली परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र देने का वादा किया गया था।
इसके एवज में प्रत्येक अभ्यर्थी से 15 लाख से 30 लाख रुपये तक की भारी-भरकम नकद राशि वसूलने की बात सामने आई थी। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले की जांच की थी।
अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर बताया था कि मार्च 2025 में पहली परीक्षा के दौरान ही व्यापक स्तर पर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद ओपीआरबी को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।
