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ओडिशा: 341 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में घिरे खनन कारोबारी रतिकांत राउत, ED ने दाखिल की चार्जशीट

Published: Mon, 19 Oct 2026 09:47 PM (IST)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओडिशा में अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में खनन कारोबारी रतिकांत राउत के खिलाफ पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल किया है।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक फोटो।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक फोटो।

HighLights

  1. ईडी ने रतिकांत राउत के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया।

  2. अवैध खनन से 341 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जुटाई।

  3. पट्टे की सीमा से बाहर खनन और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खनन कारोबारी रतिकांत राउत के खिलाफ पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल किया है।

ईडी के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 अक्टूबर को भुवनेश्वर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में यह परिवाद दाखिल किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि राउत और उससे जुड़ी कंपनियों ने अवैध गतिविधियों के जरिये 341 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई है।

इस मामले में यह पहला पूरक अभियोजन परिवाद है। इससे पहले सात जुलाई, 2026 को राउत की पत्नी लक्ष्मीप्रिया पुष्टि और उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ मुख्य अभियोजन परिवाद दाखिल किया गया था।

ईडी ने ओडिशा पुलिस की ओर से दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर राउत के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, राउत के खिलाफ ओडिशा के विभिन्न थानों में कुल 27 प्राथमिकी दर्ज हैं। इनमें अवैध खनन, चोरी, डकैती और विस्फोटकों की आपूर्ति से जुड़े मामले शामिल हैं।

पट्टे की सीमा से बाहर भी खनन का आरोप

ईडी के मुताबिक, राउत के पास ढेंकानाल जिले में लघु खनिज खदानों के पट्टे थे। हालांकि, उसने कथित तौर पर निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया और पट्टा क्षेत्र से बाहर भी अवैध उत्खनन कराया।

उस पर अवैध रूप से विस्फोटकों की खरीद और इस्तेमाल करने के साथ खनिजों की चोरी तथा उनमें मिलावट करने का भी आरोप है।

ओडिशा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (ओआरएसएसी) की ओर से कराए गए ड्रोन और उपग्रह सर्वेक्षण में पट्टा क्षेत्रों के भीतर निर्धारित सीमा से अधिक खनन का पता चला।

इसके अलावा, पट्टा क्षेत्र से बाहर सात स्थानों पर भी अनधिकृत उत्खनन की पुष्टि हुई। इनमें सरकारी जमीन के साथ राउत की कंपनी मेसर्स एश्योरेंस कॉनडेव प्राइवेट लिमिटेड की जमीन भी शामिल है।

कई कंपनियों के जरिये धन के लेन-देन का आरोप

जांच एजेंसी का आरोप है कि राउत ने अपराध से अर्जित धन को छिपाने और उसका हस्तांतरण करने के लिए कई बैंक खातों और व्यावसायिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया।

इनमें मां तारिणी स्टोन क्रशर, आरएलआर मर्केंटाइल, साई शंभू इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और एश्योरेंस मेटालॉयड एक्सिम प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इस प्रक्रिया में उसकी पत्नी लक्ष्मीप्रिया पुष्टि समेत अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

ईडी के अनुसार, कथित अवैध कमाई से राउत ने अपने नाम, परिवार के सदस्यों के नाम और संबंधित कंपनियों के माध्यम से चल-अचल संपत्तियां अर्जित कीं।

एजेंसी इन संपत्तियों को अपराध से अर्जित धन छिपाने और उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश से जोड़कर देख रही है।

अगस्त में हुई थी गिरफ्तारी

ईडी ने इस मामले में आठ जनवरी, 2025 को राउत से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद 20 अगस्त, 2026 को उसे गिरफ्तार किया गया।

विशेष अदालत ने उसे पांच दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा था। 26 अगस्त को उसकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बाद में सात सितंबर को जांच एजेंसी की ओर से नए आपत्तिजनक साक्ष्य पेश किए जाने के बाद अदालत ने राउत को चार दिनों की अतिरिक्त ईडी हिरासत में देने की अनुमति दी।

ईडी के मुताबिक, अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग में उसकी प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया था। अब पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल होने के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।

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