विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ओडिशा: बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए पिता ने बेच दी जमीन, कम पड़े पैसे तो गिरवी रखा पेंशन कार्ड

Published: Thu, 22 Oct 2026 10:24 AM (IST)

कंधमाल, ओडिशा के एक बुजुर्ग दंपती ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी जमीन बेच दी और बुढ़ापा ...और पढ़ें

अपने माता-पिता के साथ नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाला सुशांत सुनामाझी

अपने माता-पिता के साथ नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाला सुशांत सुनामाझी

HighLights

  1. बुजुर्ग दंपती ने बेटे की पढ़ाई के लिए जमीन बेची।

  2. मेडिकल दाखिले हेतु पेंशन कार्ड भी गिरवी रखे।

  3. बेटे की आगे की पढ़ाई के खर्च की चिंता।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर( कंधमाल)। ओडिशा के कंधमाल जिले के एक बुजुर्ग दंपती ने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है। 70 वर्षीय केपांगा सुनामाझी और उनकी पत्नी नगातालु सुनामाझी ने बेटे सुशांत सुनामाझी की मेडिकल की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन बेच दी। 

दाखिले के लिए पैसे कम पड़े तो बुढ़ापा पेंशन के दोनों कार्ड भी गिरवी रख दिए। बेटे ने नीट में सफलता हासिल कर जाजपुर स्थित महाराजा जाजति केशरी सरकारी मेडिकल कालेज में दाखिला पाया है। परिवार को बेटे की उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उसकी आगे की पढ़ाई का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है।

12 हजार रुपये में गिरवी रखा

कंधमाल जिले के दारिंगबाड़ी ब्लाक के धुसारी गांव निवासी इस दंपती की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इसके बावजूद उन्होंने बेटे के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

सुशांत के कॉलेज में दाखिले के लिए पिता ने एक पेंशन कार्ड गांव के साहूकार के पास 12 हजार रुपये में गिरवी रखा। वहीं, दूसरा कार्ड स्वयं सहायता समूह की एक सदस्य के पास 12 हजार रुपये में गिरवी रखना पड़ा। इस तरह दोनों कार्डों के बदले 24 हजार रुपये जुटाए गए।

व्यवस्था के अनुसार, कर्ज की राशि चुकाने तक साहूकार और स्वयं सहायता समूह की सदस्य संबंधित कार्डों पर मिलने वाली पेंशन की रकम लेते रहेंगे। इससे बुजुर्ग दंपती को अपनी पेंशन से भी वंचित रहना पड़ेगा। परिवार ने दूसरे स्रोतों से भी कर्ज लिया है और बेटे की पढ़ाई के लिए अपनी कुछ जमीन बेच दी है।

बेटे की सफलता से खुशी, आगे के खर्च की चिंता

धुसारी गांव के स्वयं सहायता समूह की सदस्य अर्फा माझी ने बताया कि माता-पिता की परेशानी देखकर उन्होंने पेंशन कार्ड के बदले उन्हें पैसे दिए, ताकि बेटे का दाखिला हो सके।

सुशांत की मां नगातालु सुनामाझी ने कहा कि बेटे की सफलता से वे बेहद खुश हैं, लेकिन पढ़ाई के खर्च की चिंता सता रही है। मेडिकल कालेज की फीस के अलावा बेटे के रहने, खाने, किताबों और अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए भी पैसे चाहिए। पूरे मेडिकल पाठ्यक्रम के दौरान इन खर्चों का इंतजाम कैसे होगा, यही परिवार की सबसे बड़ी चिंता है।

सुशांत भी परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित है। माता-पिता पहले ही जमीन बेच चुके हैं और पेंशन कार्ड गिरवी रखकर पैसे जुटा चुके हैं। इसके बावजूद परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उन्हें भरोसा है कि सुशांत अपनी पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनेगा और जरूरतमंद लोगों की सेवा करेगा। बेटे के भविष्य के लिए बुजुर्ग दंपती का यह त्याग आर्थिक तंगी के बीच उनके हौसले और संकल्प की कहानी बयां करता है।

यह भी पढ़ें- ओडिशा की बेटी का कमाल, संघर्षों को मात देकर एशियाई पैरा खेल 2026 में पायल नाग ने जीता सिल्वर