ओडिशा के कोरापुट में 240 एकड़ में लहराएगी पीली सरसों, किसानों को मिले मुफ्त बीज और खाद
ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने कोरापुट जिले में सरसों और तोरिया की खेती को बढ़ावा देने के लिए 240 एकड़ भूमि ...और पढ़ें

किसानों को मिले मुफ्त बीज और खाद
HighLights
कोरापुट में 240 एकड़ पर सरसों-तोरिया खेती को बढ़ावा।
किसानों को मुफ्त बीज, उर्वरक, तकनीकी सहायता प्रदान की गई।
विश्वविद्यालय का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि विकास।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। कोरापुट जिले में सरसों और तोरिया की खेती को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने पहल शुरू की है। इसके तहत जिले में करीब 240 एकड़ कृषि भूमि चिह्नित की गई है।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कृषि विभाग की ओर से बोरिगुम्मा प्रखंड की अंचला ग्राम पंचायत कार्यालय परिसर में बीज वितरण एवं कृषि प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पहले चरण में बोरिगुम्मा और कोटपाड़ प्रखंड के 75 किसानों के बीच सरसों एवं तोरिया के बीज और उर्वरक वितरित किए गए। इस चरण में 25 एकड़ से अधिक भूमि पर खेती की जाएगी।
किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार शासनी ने कहा कि अविभाजित कोरापुट क्षेत्र के किसान उद्यमशील, प्रगतिशील और मेहनती हैं। यहां उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती का विस्तार करने और किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी विशेषज्ञता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगा। किसानों से परामर्श के बाद जिले में सरसों एवं तोरिया की खेती के लिए 240 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। यह पहल क्षेत्र में कृषि विकास की दिशा में महज शुरुआत है।
इस मौके पर बोरिगुम्मा के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सुकांत कुमार पटनायक ने कृषि क्षेत्र में महिला किसानों की बढ़ती भागीदारी और नई तकनीक सीखने के प्रति उनके उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों की आय बढ़ेगी और अधिक किसान सरसों-तोरिया की खेती के लिए प्रेरित होंगे।
बाजार से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय करेगा प्रयास
विश्वविद्यालय के कृषि विभाग की अध्यक्ष डॉ. मंजुश्री सिंह ने किसानों को सरसों की खेती की वैज्ञानिक तकनीक, उत्पादन बढ़ाने के उपाय और इससे होने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने पर किसानों को बाजार से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय प्रयास करेगा। इसके अलावा तेल निष्कर्षण और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए भी तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की योजना है।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के संकाय सदस्यों ने खेतों में व्यावहारिक प्रदर्शन कर किसानों को उन्नत खेती की जानकारी दी। अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
इस अवसर पर अंचला ग्राम पंचायत के सरपंच दशरथी माझी, कृषि विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. लोपामुद्रा बेहरा, ओएलएम के बीपीएम प्रभारी देवेंद्र पांडा, समाजसेवी लक्ष्मीनारायण बॉक्सी सहित दोनों प्रखंडों के किसान और कृषि मित्र उपस्थित थे। विश्वविद्यालय का लक्ष्य किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाना और क्षेत्र में सतत कृषि विकास को प्रोत्साहित करना है।
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