ओडिशा विधानसभा में 14 घंटे का मैराथन सत्र, 33% महिला आरक्षण लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी
ओडिशा विधानसभा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। यह ...और पढ़ें


समय कम है?
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जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) को शीघ्र लागू करने के आग्रह संबंधी प्रस्ताव को पारित कर दिया। "लोकतंत्र को मजबूत करने में भारतीय महिलाओं की भूमिका" विषय पर आयोजित विशेष सत्र में यह निर्णय लिया गया, जो गुरुवार सुबह 11 बजे शुरू होकर रात 12:45 बजे तक चला। करीब 14 घंटे 45 मिनट तक चली यह बहस विधानसभा के सबसे लंबे सत्रों में दर्ज हो गई।
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की तत्काल जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में महिला विधायकों की संख्या घटकर 11 रह गई है, जबकि पिछले कार्यकाल में यह संख्या 18 थी। उन्होंने कहा कि देश में महिलाएं लगभग आधी आबादी हैं, लेकिन विधानसभाओं में उनकी हिस्सेदारी अभी भी 15-20% के बीच सीमित है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में केंद्र सरकार द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी दलों से इसे शीघ्र लागू करने की दिशा में सहयोग का आह्वान किया।
बहस में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की सक्रिय भागीदारी रही। बीजू जनता दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रस्ताव के मूल उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन इसके समय को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष ने चेताया कि यदि आरक्षण को 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया, तो यह प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
साथ ही विपक्ष ने राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण की पुरानी पहल का जिक्र करते हुए पंचायती राज संस्थाओं में 50% आरक्षण लागू करने के पूर्व निर्णय को याद दिलाया।
प्रस्ताव में केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री मांझी ने बताया कि राज्य बजट में महिला-केंद्रित योजनाओं के लिए 1.22 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो लैंगिक बजट में 30% की वृद्धि दर्शाता है।
सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे सुभद्रा योजना, लखपति दीदी कार्यक्रम (जिसका लक्ष्य 17 लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है) और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को इस दिशा में अहम बताया गया।
सत्र के अंत में सभी राजनीतिक दलों से अपील की गई कि आगामी चुनावों में वे स्वेच्छा से कम से कम 33% टिकट महिलाओं को दें, ताकि कानून लागू होने से पहले ही राजनीतिक भागीदारी में संतुलन स्थापित किया जा सके।
