ओडिशा विधानसभा में मानसून सत्र का आगाज हंगामे से, प्रश्नकाल में विपक्ष ने की नारेबाजी; बुधवार तक सदन स्थगित
ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र हंगामेदार रहा, जहां प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर नारेबाजी की। लगातार ...और पढ़ें

हंगामे की भेंट चढ़ा ओडिशा विधानसभा का पहला दिन।
HighLights
मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ।
विपक्षी सदस्यों ने MMDR एक्ट और पाठ्यपुस्तक त्रुटियों पर विरोध किया।
शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही बुधवार तक स्थगित की गई।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मंगलवार को सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा किया।
लगातार शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक एवं फिर बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।
जानकारी के मुताबिक सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सबसे पहले दिवंगत नेताओं तथा नेपाल में बाढ़ के कारण जान गंवाने वाले लोगों के प्रति शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूर्व मंत्री डंबरू माझी, सुशांत सिंह, पूर्व सरकारी मुख्य सचेतक सत्यभूषण साहू, राममूर्ति गमांगो, हाजी मोहम्मद अयूब खान और शिवाजी माझी के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा।
सीएम के शोक प्रस्ताव का विपक्ष ने किया समर्थन
मुख्यमंत्री के शोक प्रस्ताव का विपक्षी दलों ने भी समर्थन किया। इसके बाद सभी सदस्यों ने खड़े होकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
हालांकि, शोक प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, कांग्रेस विधायकों ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) (एम एम डी आर) संशोधन अधिनियम को लेकर नारेबाजी की, वहीं बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्यों ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में छपाई की गलतियों को लेकर सरकार को घेरा।

विपक्षी सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और हंगामा करने लगे। स्थिति को देखते हुए अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी।
इस हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ बीजेपी विधायक इराशीष आचार्य ने जोर देकर कहा कि सत्ताधारी सरकार सदन के पटल पर दोनों मामलों पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आचार्य ने कहा, "बीजेपी सरकार दोनों मुद्दों पर चर्चा के लिए हमेशा तैयार है। हमने एम एम डी आर अधिनियम पर चर्चा के लिए कांग्रेस के नोटिस को पहले ही स्वीकार कर लिया था। हालांकि, विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के बजाय, उन्होंने बाहर विरोध प्रदर्शन करना चुना।"
स्कूली पाठ्यपुस्तकों से जुड़े विवाद पर बात करते हुए, आचार्य ने बताया कि सुधारात्मक उपाय तेजी से चल रहे हैं और 50,000 संशोधित किताबें पहले ही छात्रों के बीच बांटी जा चुकी हैं।
विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए, बीजेपी विधायक ने नेतृत्व पर जानबूझकर विधायी जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष को निशाना बनाते हुए दावा किया कि सदन से बचना उनकी एक पुरानी आदत है।

आचार्य ने दावा किया कि विधानसभा की कार्यवाही बाधित होने के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष सदन से चले गए, और यह नोट किया कि विधायी बहसों से बचना "उनके लिए कोई नई बात नहीं है।"
प्रदर्शन के औचित्य पर सवाल उठाते हुए आचार्य ने जोर देकर कहा, "जनता ने हमें उनकी समस्याओं पर चर्चा करने के लिए विधानसभा भेजा है। वे इस मंच का उपयोग करने के बजाय हंगामा क्यों कर रहे हैं?"
यह उम्मीद की जा रही है कि खनिज अधिकारों, प्रशासनिक निगरानी और शैक्षणिक सुधारों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी बेंचों के आमने-सामने आने से आगामी मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहेगा।
3 अक्टूबर तक चलेगा मानसून सत्र
उल्लेखनीय है कि विधानसभा का मानसून सत्र 22 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान कुल नौ कार्यदिवस निर्धारित किए गए हैं। बारिश और खराब मौसम के बीच उनके उपकरणों की सुरक्षा को लेकर चिंता मीडिया कर्मियों ने जताई चिंता
विधानसभा के भीतर प्रवेश नहीं मिलने के कारण मीडिया कर्मियों को अपने कैमरों और उपकरणों के साथ गेट के बाहर खड़ा रहना पड़ रहा है। बारिश और खराब मौसम के बीच उनके उपकरणों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। कृपया मीडिया कर्मियों और उनके कैमरों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था कराने का कष्ट करें।
