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कोटिया विवाद पर सियासत गर्म: 'TDP के दबाव में चुप है BJP सरकार?', नवीन पटनायक ने CM माझी से पूछे तीखे सवाल

Published: Mon, 19 Oct 2026 09:59 PM (IST)

आंध्र प्रदेश द्वारा कोटिया ग्राम पंचायत के विवादित गांवों में पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद ओडिशा में राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

नवीन पटनायक। (फाइल फोटो)

नवीन पटनायक। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. आंध्र प्रदेश ने कोटिया के विवादित गांवों में चुनाव घोषित किए।

  2. नवीन पटनायक ने ओडिशा सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।

  3. दशकों पुराना कोटिया सीमा विवाद फिर से गरमाया।

एजेंसी, भुवनेश्वर। ओडिशा के कोरापुट जिले के कोटिया ग्राम पंचायत के तीन गांवों में आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेडी (BJD) अध्यक्ष नवीन पटनायक ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया है।

पटनायक ने सवाल उठाया कि क्या केंद्र में एनडीए सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) पर भारतीय जनता पार्टी की निर्भरता के कारण ओडिशा सरकार इस मुद्दे पर खामोश बैठी है।

'डबल इंजन सरकार के दावों का क्या हुआ?'

विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने लेटर में लिखा कि आंध्र प्रदेश की टीडीपी सरकार ने कोटिया पंचायत के फागुगुनेसीनेरी, गंजईपादर और फातुसीनेरी गांवों में चुनाव की घोषणा कर दी है।

उन्होंने बीजेपी के पुराने वादों को याद दिलाते हुए पूछा कि बीजेपी के उन आश्वासनों का क्या हुआ कि कोटिया ओडिशा का हिस्सा है? चुनाव से पहले 'डबल-इंजन' सरकार का वादा किया गया था कि कोटिया मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाएगा और ओडिशा के स्वाभिमान की रक्षा होगी।

पटनायक ने आगे सवाल किया कि 2025 में गठित 16 सदस्यीय उच्चस्तरीय कोटिया समिति की सिफारिशें क्या थीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई? उन्होंने पूछा कि क्या राजनीतिक मजबूरी के कारण ओडिशा सरकार राज्य के हितों और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता कर रही है?

बीजेपी का दोहरा रवैया

कांग्रेस विधायक दल के नेता और कोरापुट से विधायक राम चंद्र कदम ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा की बीजेपी सरकार के दोहरे रवैये के कारण ही आंध्र प्रदेश इस क्षेत्र पर अपना दावा मजबूत कर पा रहा है। कदम ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।

भड़काऊ प्रयासों को करेंगे नाकाम

विपक्ष के हमलों के बीच, ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार पड़ोसी राज्य के किसी भी भड़काऊ प्रयास को नाकाम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पुजारी ने स्पष्ट किया कि कोटिया ग्राम पंचायत ओडिशा का अभिन्न अंग है।

उन्होंने बताया कि दक्षिणी प्रभाग के राजस्व मंडलायुक्त (RDC) और कोरापुट के जिला मजिस्ट्रेट को स्थिति पर कड़ी नजर रखने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोटिया आंध्र प्रदेश की चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा न बने।

दशकों पुराना है कोटिया सीमा विवाद

कोटिया ग्राम पंचायत के 28 में से 21 गांवों पर अधिकार को लेकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच दशकों पुराना विवाद चल रहा है:

  • 1968: मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने दोनों राज्यों को यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया।
  • 2006: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतर-राज्यीय सीमा विवादों का समाधान संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत संसद द्वारा किया जाना ही सबसे बेहतर है।
  • 2022: ओडिशा ने जनवरी 2022 में शीर्ष अदालत में एक नया मूल वाद दायर किया, जो अभी भी विचारधीन है।

इसके बावजूद, आंध्र प्रदेश द्वारा इन विवादित गांवों में चुनाव की घोषणा करने से दोनों राज्यों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ।

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