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एक कॉल... 35 घंटे की कैद और 1 करोड़ की मांग; भुवनेश्वर से आया 'डिजिटल अरेस्ट' का चौंकाने वाला मामला

Published: Thu, 12 Feb 2026 06:11 PM (GMT+05:30)

भुवनेश्वर में एक सेवानिवृत्त नाल्को अधिकारी और उनकी पत्नी को साइबर ठगों ने 35 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा। ...और पढ़ें

साइबर ठगों ने दंपती को 35 घंटे तक रखा डिजिटल अरेस्ट। (सांकेतिक फोटो)

साइबर ठगों ने दंपती को 35 घंटे तक रखा डिजिटल अरेस्ट। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. सेवानिवृत्त दंपती को 35 घंटे 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया।

  2. साइबर ठगों ने 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी।

  3. पुलिस की मदद से बड़ी धोखाधड़ी टल गई।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। भुवनेश्वर में साइबर धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नयापल्ली इलाके में रहने वाले नाल्को (NALCO) के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी और उनकी पत्नी, जो एक सेवानिवृत्त व्याख्याता हैं, को साइबर अपराधियों ने लगभग 35 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और उनसे 1 करोड़ रुपये की उगाही करने की कोशिश की।

दंपती द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि आतंकवादी उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं और वे आतंक से जुड़े मामलों में जांच के दायरे में हैं।

आतंक से जुड़े होने की धमकी

ठग ने उन्हें तुरंत गिरफ्तारी की धमकी दी और निर्देश दिया कि वे बिना अनुमति घर से बाहर न निकलें। गंभीर आरोपों से डरे हुए बुजुर्ग दंपती ने उसकी बात मान ली और करीब डेढ़ दिन तक अपने घर में ही बंद रहे। ठग ने कथित तौर पर मामला ‘रफा-दफा’ करने और कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की।

साइबर पुलिस से संपर्क

हालांकि, जब दंपती पैसे ट्रांसफर करने के लिए बैंक पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि ठग द्वारा दिया गया खाता निष्क्रिय है। इससे उन्हें शक हुआ। आगे जांच करने पर उन्हें समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।

इसके बाद दंपती ने तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क किया, जिससे एक बड़ी आर्थिक ठगी होने से बच गई। अधिकारियों ने नागरिकों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों से सतर्क रहें और फोन पर किए गए किसी भी दावे की पुष्टि किए बिना कोई कदम न उठाएं।

खुद को बताया पटना का पुलिस अधिकारी

पीड़ित महिला ने बताया, मैं हमेशा लोगों को ऐसे मामलों से सावधान रहने की सलाह देती थी, लेकिन यह मेरे साथ हुआ तो मैं खुद समझ नहीं पाई। यह घटना 9 फरवरी को हुई। मुझे एक व्यक्ति का फोन आया जिसने खुद को ‘पटना का पुलिस अधिकारी’ बताया।

उसने कहा कि एक आतंकवादी, करीम खान, मेरे आधार कार्ड का इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए कर रहा है। यह सुनने के बाद मैंने फोन अपने पति को दे दिया। बाद में उन्होंने धमकी दी कि हमारे खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और हमें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वे पुलिस की वर्दी में थे और फिर बोले कि जम्मू-कश्मीर के एचडीएफसी बैंक में हमारा एक खाता है। हम बहुत डर गए और उनकी 1 करोड़ रुपये की मांग मान ली।

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