लंदन । भारत ने दिल्ली में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड को लेकर बनी डॉक्युमेंट्री फिल्म पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या की है। शुक्रवार की रात यहां इसके प्रदर्शन के बाद इसकी निर्देशक लेस्ली वुडविन ने यह बात कही। नई दिल्ली में भी ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने शनिवार को कहा कि सरकार को वर्ष 2012 के दिसंबर की इस घटना पर बनी बीबीसी की इस विवादित डाक्युमेंटरी के प्रसारण की इजाजत देनी चाहिए। बीईए विभिन्न खबरिया टीवी चैनलों के वरिष्ठ पत्रकारों की संस्था है।

भारत ने पिछले हफ्ते इंडियाज डॉटर नाम से बनी इस वृत्त चित्र (डाक्युमेंटरी फिल्म) की रिलीज पर रोक लगा दी थी। साथ ही वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट यू ट्यूब को इस डॉक्युमेंट्री से सभी लिंक हटा लेने को कहा था। पुलिस का कहना है कि इस पर प्रतिबंध इस वजह से लगा क्योंकि इस फिल्म में इस अपराध में शामिल एक अपराधी ने जो टिप्पणियां की थी उनसे डर और तनाव का माहौल बनता और इससे जनाक्रोश बढ़ने का खतरा था। फिल्म की निर्देशक लेस्ली ने कहा कि मेरा मकसद भारत के प्रति आभार जताना था क्योंकि इस दुष्कर्म के जवाब में एक देश के रूप में भारत ने एक अनुकरणीय काम किया था। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वे अब मेरे ऊपर भारत को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं। ये वे हैं जिन्होंने इस पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय आत्महत्या की है।

नई दिल्ली में बीईए के महासचिव एनके सिंह ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान में जैसा कहा गया है उसी मानदंड के अनुरूप होनी चाहिए। बीईएस का मानना है कि अभिव्यक्ति की आजादी पर तब तक कोई प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए जब तक संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के प्रावधानों के दायरे में नहीं आए।

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