बीजिंग। अमेरिका के बाद अब चीन की मीडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल पर निशाना साधा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार एक साल में मोदी की विदेश नीति में कोई नाटकीय बदलाव देखने को नहीं मिला है। साथ ही कहा गया है कि सुरक्षा चिंताओं के कारण उनकी आर्थिक पहल सिमट कर रह गई है।

अखबार में गुरुवार को प्रकाशित शिंघुआ विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता के लेख में कहा गया है कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चिंता के बावजूद मोदी ने चीन के हालिया दौरे के दौरान ई-वीजा सुविधा देने की घोषणा की। लेकिन, इससे कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि ई-वीजा के दायरे में केवल पर्यटक आते हैं। इसका विस्तार कारोबारी और कामकाजी वीजा तक करने की सलाह दी गई है। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी मीडिया ने मेक इन इंडिया अभियान पर तंज कसते हुए कहा था कि एक साल में कुछ खास नहीं हुआ है।

पूर्ववर्तियों की विरासत

लेख में कहा गया है, 'एक साल पहले की अस्पष्ट विदेश नीति में अब तक कोई नाटकीय सुधार नहीं हुआ है। यह साफ हो चुका है कि मोदी ने अपने दो पूर्ववर्तियों की विदेश नीति को विरासत में लिया है।' लेख के मुताबिक बड़ी ताकतों की राजनीति से निपटने में मोदी की क्षमता से इसका पता चलता है। वह अमेरिका और जापान से बेहतर संबंध बनाना चाह रहे हैं। चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के साथ ही उससे आर्थिक सहयोग बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं।

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सुरक्षा केंद्रित नीति

लेख में कहा गया है कि मोदी के कार्यकाल में भी भारत की चीन नीति 'पूरी तरह सुरक्षा केंद्रित' है। सीमा विवाद और चीन की पाकिस्तान नीति जैसी सुरक्षा चिंताओं से भारत की नीति तय होती है। इसके कारण चीन के साथ काम करने के लिए मोदी का आर्थिक प्रयास सुरक्षा एजेंसियों और घरेलू कट्टरपंथियों के दबाव के कारण जोखिम में पड़ गया है।

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Posted By: Kamal Verma

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