नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi MCD: कुछ माह पहले ही एकीकृत हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को अपनी नीतियों के वजह से दिल्ली के व्यापारियों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों ने उस पर विभिन्न करों में मनमाना वृद्धि का आरोप लगाते हुए अपना कारोबार उत्तर प्रदेश व हरियाणा शिफ्ट करने की धमकी दी है। इस मामले में कारोबारी संगठन कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने गृहमंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

उसने गृहमंत्री को लिखे पत्र में एमसीडी द्वारा संपत्ति कर, पार्किंग व कन्वर्जन शुल्क, व्यापार लाइसेंस शुल्क तथा सफाई कर की दरों में मनमानी, तर्कहीन और अनुचित वृद्धि का आरोप लगाया है। उसके मुताबिक इसके चलते दिल्ली में व्यावसायिक गतिविधियां करना काफी मुश्किल हो गया है और नियमित तौर पर व्यापार को किसी न किसी बहाने से अधिक राजस्व प्राप्त करने का जरिया बनाया जा रहा है।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो दिल्ली के व्यापारी अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को उत्तर प्रदेश व हरियाणा के आस-पास के इलाकों में शिफ्ट करने को मजबूर हो जाएंगे। कैट ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी इसी तरह का पत्र भेजा है। कैट ने पत्र में नाराजगी जताते हुए कहा कि कैट के नेतृत्व में दिल्ली के व्यापारियों ने हमेशा कई मुद्दों पर केंद्र सरकार का पक्ष लिया है और केंद्र सरकार ने भी कैट द्वारा उठाए गए अनेक मुद्दों का समय-समय पर समाधान भी किया है।

अब उसे एमसीडी के विभिन्न अनुचित शुल्कों पर आवाज उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हाल ही में संपन्न हर घर तिरंगा अभियान में उसकी सक्रिय भूमिका और भागीदारी उल्लेखनीय है जब दिल्ली सहित देश के व्यापारियों ने पूरे देश में तीन हजार से अधिक तिरंगा कार्यक्रम कैट के झंडे तले आयोजित किए हैं।

गृह मंत्री अमित शाह को भेजे पत्र में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि दिल्ली नगर निगम ने संपत्ति कर, व्यापार लाइसेंस शुल्क और कन्वर्जन और पार्किंग शुल्क में अभूतपूर्व वृद्धि की है, जिससे व्यापारियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है।

दिल्ली के व्यापारिक समुदाय इससे बेहद परेशान है। इसके अलावा, एमसीडी ने अनुचित सफाई कर लगा कर व्यापारियों को बड़ी संख्या में नोटिस भी जारी किए हैं जिनका कोई औचित्य ही नहीं है। कैट के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विपिन आहूजा व प्रदेश महामंत्री देवराज बवेजा ने कहा कि दिल्ली के व्यापारियों से पार्किंग और कन्वर्जन चार्ज के रूप में हजारों करोड़ रुपये लेने वाली एमसीडी ने केंद्र सरकार के उन नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं जिनके तहत उक्त कर संग्रह को एक अलग खाते में जमा किया जाना था और इस राशि को संबंधित व्यापार संघ के परामर्श से इन बाजारों में पार्किंग और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उपयोग किया जाना था।

खंडेलवाल ने आगे कहा कि भले ही सर्वोच्च न्यायालय ने भी मास्टर प्लान 2021 में निर्धारित केंद्र सरकार के इस निर्णय की पुष्टि की हो। हमें यह जानकर खेद है कि पार्किंग आदि के विकास के बजाय उक्त राशि का उपयोग कुछ अन्य अज्ञात उद्देश्यों के लिए किया गया है। एमसीडी ने किसी भी व्यापारिक संगठन से इस मुद्दे पर कोई परामर्श नही किया है।

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Edited By: Vinay Kumar Tiwari