श्रीनगर, [जाब्यू]। वापस जाओ की नारेबाजी और विभिन्न जगहों पर हिंसक झड़पों व पथराव के बीच विश्वविख्यात संगीतज्ञ जुबिन मेहता शुक्रवार को जर्मन राजदूत माइकल स्टेनर के साथ श्रीनगर पहुंच गए। जम्मू-कश्मीर सरकार ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरे कश्मीर में सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं। पुलिस और सेना के जवानों के अलावा सीआरपीएफ की 25 कंपनियों को भी सुरक्षा बंदोबस्त में लगाया गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी गुरुवार को कार्यक्रम स्थल शालीमार बाग का दौरा किया।

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गौरतलब है कि जर्मनी दूतावास की तरफ से सात सितंबर को बावेरियन आर्केस्ट्रा के संचालक मास्टर जुबिन मेहता की संगीत संध्या 'अहसास-ए-कश्मीर' आयोजित किया जा रहा है। आतंकियों ने जहां इस संगीत कार्यक्रम और इसमें भाग लेने वालों को धमकी दी है, वहीं अलगावादियों ने लोगों से इसके बहिष्कार की अपील करते हुए शनिवार को कश्मीर बंद का एलान किया है। कुछ अलगाववादी संगठनों ने छात्रों से शुक्रवार को नमाज-ए-जुमा के बाद संगीत संध्या के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। स्कूल-कॉलेज के छात्र तो सड़कों पर नहीं आए, लेकिन कश्मीर विश्वविद्यालय में छात्रों ने 'गो जुबिन गो बैक' की नारेबाजी करते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। भारत, जर्मनी, अमेरिका और इस्रायल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर से बाहर जुलूस निकालने का भी प्रयास किया।

वहीं श्रीनगर के डाउन-टाउन के सर्राफकदल, दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा व त्राल और उत्तरी कश्मीर में बारामूला, पलहालन व हाजिन में नमाज के बाद लोगों ने जुबिन मेहता के कार्यक्रम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाले। रोकने पर वे हिंसक हो उठे और पथराव करने लगे। इस पर पुलिस ने भी इन्हें खदेड़ने के लिए बलप्रयोग किया। झड़पों में पांच लोग जख्मी हो गए, जबकि छह युवकों को पथराव के आरोप में पकड़ा गया। पैंथर्स पार्टी ने भी संगीत संध्या के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बीच जुबिन मेहता दोपहर बाद दिल्ली से श्रीनगर पहुंचे। पूरी वादी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शहर में आने-जाने के सभी रास्तों को सील कर दिया गया और सभी वाहनों की तलाशी ली जा रही है।

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गुल पनाग होंगी मंच संचालक :

सिने तारिका गुल पनाग 'अहसास-ए- कश्मीर' में मंच संचालन करेंगी। जुबिन मेहता अपने कार्यक्रम को शुरू करने से पूर्व देश के प्रमुख संतूरवादकों में शामिल अभय सोपोरी की संगीतबद्घ रचना की भी प्रस्तुति देंगे। इस दौरान कश्मीर के लोक वाद्ययंत्रों संतूर, रवाब, तुंबकनारी की तान गूंजेगी और इससे ही समारोह की शुरुआत होगी।

104 देशों में सीधा प्रसारण :

बीते 60 सालों में कश्मीर में आयोजित यह पहला कार्यक्रम होगा, जिसका 104 देशों में दर्शक घर बैठ अपने टेलीविजन पर सीधा प्रसारण देख सकेंगे। इसके अलावा दूरदर्शन इस कार्यक्रम को हाईडेफिनेशन चैनल पर भी प्रसारित करेगा।

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