UPI ट्रांजैक्शन पर क्यों नहीं लगना चाहिए चार्ज? नीति आयोग के पूर्व VC राजीव कुमार ने बताई पूरी बात
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को सुझाव दिया है कि यूपीआई लेनदेन को कुछ और सालों ...और पढ़ें

राजीव कुमार ने यूपीआई लेनदेन को मुफ्त रखने की वकालत की

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सोमवार को सरकार को सुझाव दिया कि वह कम से कम कुछ और साल के लिए बिना किसी फीस वाले यूपीआई लेनदेन की सुविधा जारी रखे।
उन्होंने कहा कि जब तक करेंसी-टू-जीडीपी अनुपात में गिरावट के स्पष्ट संकेत न दिखें, तब तक इस व्यवस्था को बनाए रखा जाए और उसके बाद ही स्थिति की समीक्षा की जाए।
कुमार ने समाचार एजेंसी PTI से कहा कि वह किसी भी ट्रांजैक्शन वैल्यू के लिए UPI का इस्तेमाल करने पर व्यापारियों से कोई फीस लेने के पक्ष में नहीं हैं और सरकार को इसे बड़े पैमाने पर सकारात्मक असर वाली एक 'पब्लिक गुड' (जन-हित की सेवा) के तौर पर देखना चाहिए।
UPI पर क्यों न लगे टैक्स?
'UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए सरकारी खजाने पर जो 20000 करोड़ रुपये का खर्च आता है, उसके मुकाबले इसके कुल फायदे कहीं ज्यादा हैं। इसलिए कम से कम कुछ और सालों तक बिना फीस वाले UPI ट्रांजैक्शन जारी रखें, जब तक कि करेंसी-टू-GDP अनुपात में गिरावट के संकेत न दिखें। हालांकि 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 2000 रुपये से कम के होते हैं, लेकिन अनुमान है कि वैल्यू के हिसाब से लगभग 66 प्रतिशत ट्रांजैक्शन इस स्तर से ऊपर होते हैं।
इससे ट्रांजैक्शन के वापस कैश में बदलने का एक बहुत बड़ा मौका बन सकता है; जरा सी भी फीस लगाने से इस तरह के पीछे ले जाने वाले व्यवहार को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल, अच्छी चीज को जारी रखने के लिए मौजूदा स्थिति को बनाए रखना ही सबसे अच्छा है।
लगभग छह साल तक पूरी तरह से मुफ्त UPI पेमेंट की सुविधा के बाद, सरकार ने 15 सितंबर को एलान किया कि 15 अक्टूबर से इस प्लेटफॉर्म के जरिए व्यापारियों को 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांसफर पर 0.4 प्रतिशत फीस लगेगी, जबकि रोजमर्रा के पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन और छोटे पेमेंट को किसी भी चार्ज से अलग रखा गया है।
UPI पर वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, 'UPI के जरिए ऐसे पेमेंट करते समय ग्राहकों को कोई चार्ज नहीं देना होगा।' मंत्रालय ने आगे कहा, 'MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लगने वाला एक चार्ज है। यह UPI पेमेंट करने वाले ग्राहकों पर लगने वाला चार्ज नहीं है।'
साथ ही, मंत्रालय ने कहा था कि लोगों के लिए 'बिना किसी मासिक कोटा, वॉल्यूम प्रतिबंध या मुफ्त UPI ट्रांजैक्शन पर टियर-आधारित सीमा के, अनलिमिटेड मुफ्त इस्तेमाल की सुविधा जारी रहेगी।
सरकार के इस कदम की विपक्षी पार्टियों ने कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि यह लेवी (शुल्क) अमेरिकी दबाव के आगे समझौता कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक और समर्पण है।
बीजेपी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर फर्जी खबरें फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि ग्राहकों पर MDR चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
15 अक्टूबर से लगेगा चार्ज
15 अक्टूबर से, UPI के जरिए 2000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 75,000 रुपये और उससे ज्यादा के पेमेंट के लिए 300 रुपये तय की गई है।
जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर - जैसे रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती से जुड़े सामान - 2000 रुपये से ज्यादा के हर ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फिक्स्ड MDR होगा। इन कैटेगरीज का P2M ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में लगभग 17 प्रतिशत और P2M ट्रांजैक्शन की संख्या में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा है।
