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यूपीआई एमडीआर पर घमासान: संसदीय समिति ने कहा - 'सब कुछ रिकॉर्ड पर है, रिपोर्ट सर्वसम्मति से हुई पास'

Published: Sun, 20 Sep 2026 02:10 AM (IST)

यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ...और पढ़ें

यूपीआई एमडीआर पर संसदीय समिति ने कहा- सब कुछ रिकॉर्ड पर है (फाइल फोटो)

यूपीआई एमडीआर पर संसदीय समिति ने कहा- सब कुछ रिकॉर्ड पर है (फाइल फोटो)

HighLights

  1. यूपीआई एमडीआर पर संसदीय समिति ने कहा- सब कुछ रिकॉर्ड पर है

  2. कहा, रिपोर्ट सर्वसम्मति से और तय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनाई गई

  3. संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने समिति की रिपोर्ट का बचाव किया

एएनआई, नई दिल्ली। यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब ने समिति की रिपोर्ट का पुरजोर बचाव किया है।

विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सब कुछ रिकॉर्ड पर है और यह रिपोर्ट पूरी तरह से सर्वसम्मति से और तय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनाई गई थी।

महताब की यह टिप्पणी तब आई जब कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में उन दावों को खारिज कर दिया कि विपक्षी सदस्यों ने डिजिटल पेमेंट पर एमडीआर लागू करने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महताब ने कहा कि समिति रिपोर्ट पर चर्चा, तैयारी और उसे अपनाने की एक तय प्रक्रिया का पालन किया गया है।

विवाद का मुख्य कारण हाल ही में नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआइ लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाया है, जो कि 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होगी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे वापस लेने की मांग की है।

इसके जवाब में सरकार और भाजपा ने संसदीय समिति की अगस्त 2026 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें यूपीआइ इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए एक चरणबद्ध राजस्व माडल को जल्द लागू करने की सिफारिश की गई थी।

एमडीआर लागू करने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। भाजपा का दावा है कि जब यह रिपोर्ट पास हुई, तब समिति में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी और गौरव गोगोई वहां मौजूद थे और उन्होंने कोई लिखित असहमति दर्ज नहीं कराई थी।