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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बच्चों को बताएं, क्या है 'गुड टच' और 'बैड टच': दिल्ली हाईकोर्ट

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Published: Tue, 26 Aug 2014 07:45 AM (GMT+05:30)Updated: Tue, 26 Aug 2014 08:32 AM (GMT+05:30)

महिला एवं बाल यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं के लिए एक तरह से हम भी जिम्मेदार है और इन घटनाओं ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [पवन कुमार]। महिला एवं बाल यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं के लिए एक तरह से हम भी जिम्मेदार है और इन घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी भी हमारी है। हमें अपने लड़कों को स्कूल व कालेजों में महिलाओं के प्रति आदर भाव की शिक्षा देनी चाहिए। छोटे बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि 'गुड टच' क्या है और 'बैड टच' गया है? जिससे वे शोषण का शिकार न हों। यह टिप्पणी दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने यौन शोषण रोकने संबंधी एक मामले में सुनवाई के दौरान की है।

खंडपीठ ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भी अपने भाषण में बढ़ते दुष्कर्म के मामलों के प्रति चिंता जाहिर करते हुए समाज व माता-पिताओं को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में अवगत कराया था। ऐसे में हम आशा करते हैं कि केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार लोगों को महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध व उनके कानून के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए पूरे एक्शन में काम करें। अब इस मामले की सुनवाई 14 नवंबर को होगी।

खंडपीठ ने कहा कि यौन शोषण की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार चलाए गए जागरूकता अभियान की रिपोर्ट से जाहिर हो रहा है कि सरकार प्रयास तो कर रही है, मगर यह जमीनी स्तर के नहीं हैं। साल या छह महीने में जागरूकता संबंधी एक या दो विज्ञापन देने से कुछ नहीं होने वाला है। इसलिए महिलाओं व बच्चों के प्रति होने वाले अपराध व उनके संबंध में बने कड़े कानून की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करना होगा, विशेष तौर पर झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले व ज्यादा अपराध होने वाले इलाकों में इस तरह की जागरूकता की जरूरत है।

खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह सलाहकारों की सहायता से स्कूलों में बच्चों को आडियो-विचुअल के माध्यम से 'गुड टच' और 'बैड टच' के बारे में जानकारी दें।

वहीं केंद्र सरकार ने बताया है कि उन्होंने दूरदर्शन व एआइआर को भी निर्देश दिए गए हैं कि महिलाओं के अधिकार व उनके प्रति होने वाले अपराध संबंधी कानूनों की जानकारी संबंधी विभिन्न प्रोग्राम चलाएं।

यह था पूरा मामला

एक सौतेले पिता द्वारा अपनी 14 साल की नाबालिग बेटी से दुष्कर्म किए जाने के मामले में निचली अदालत द्वारा दी गई 10 साल कैद की सजा को अभियुक्त ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। यह मामला अदालत में आने पर पीड़िता व उसकी दो बहनों और एक छोटे भाई ने अदालत से अपील की थी कि उनके पिता को छोड़ दिया जाए, क्योंकि पिता के जेल जाने के बाद उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है और वे भूखे मर रहे हैं। अदालत ने उक्त मामले में सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया था।

अदालत ने उक्त मामले में बाल यौन शोषण, दुष्कर्म और महिलाओं से छेड़छाड़ एवं छींटाकशी के मुद्दे पर केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को निर्देश दिए थे कि वह एक जागरूकता अभियान चलाए और उसकी रिपोर्ट अदालत को दे। दिल्ली सरकार ने अदालत में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था कि उन्होंने दो विापन अलग-अलग अखबारों में छपवाए हैं। इस रिपोर्ट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते दिनों नाराजगी जाहिर की थी। अब इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा भी अपनी रिपोर्ट जाहिर की गई।

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