विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

असम में UCC पारित होने से क्या होंगे बदलाव? 10 प्वाइंट्स में समझें पूरा विधेयक

Published: Mon, 25 May 2026 11:43 PM (IST)Updated: Tue, 26 May 2026 02:05 AM (IST)

असम सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश किया है, जिसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है।

असम में UCC विधेयक के मुख्य प्रविधान (फोटो-पीटीआई)

असम में UCC विधेयक के मुख्य प्रविधान (फोटो-पीटीआई)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब भाजपा शासित एक अन्य राज्य असम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।

असम सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया, जिसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य बनाने का प्रविधान है।

हालांकि, असम में रहने वाले आदिवासी समाज पर प्रस्तावित कानून लागू नहीं होगा। संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में 'समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026' पेश किया।

कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया और विधेयक पेश करने से पहले सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श की मांग की।

असम में UCC विधेयक

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कानूनों को संकलित करना और सरल बनाना है।

विधेयक में पुरुषों के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है। बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए विधेयक में विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। यह पति-पत्नी के लिए भरण-पोषण, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

विधेयक के जरिये पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। पंजीकरण अनिवार्य करके कानून यह सुनिश्चित करेगा कि लिव-इन में रहने वाले जोड़ों और ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चों के अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता दी जाए और उनकी रक्षा की जाए।

महिला आरक्षण के समर्थन में प्रस्ताव

असम सरकार ने सोमवार को संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के समर्थन में एक प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश की संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।

यूसीसी बिल के मुख्य प्रविधान

  • प्रस्तावित कानून असम मुस्लिम विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 को निरस्त कर देगा।
  • यूसीसी लागू होने से पहले के बहुविवाह को नियमित किया जाएगा और कानूनी रूप से संरक्षित किया जाएगा।
  • द्विविवाह और बहुविवाह के लिए सात साल तक की कैद का प्रविधान होगा।
  • एक महीने के भीतर लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण नहीं कराने पर तीन महीने तक की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • बाल विवाह और वैध सहमति के बिना विवाह के लिए दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रविधान होगा।
  • बलपूर्वक, दबाव डालकर या छिपाकर किए गए विवाह पर सात वर्ष की जेल और जुर्माने का प्रविधान होगा।
  • वैध तलाक प्रक्रिया का उल्लंघन और अवैध रूप से विवाह खत्म करने पर तीन वर्ष तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है।
  • निषिद्ध संबंधों में विवाह करने पर छह महीने तक का कारावास और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • जानबूझकर 60 दिनों के भीतर विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं कराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना होगा।
  • पंजीकरण के दौरान जाली या मनगढ़ंत दस्तावेज प्रस्तुत करने पर तीन महीने तक का कारावास या 25 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- असम के आर्थिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से की मुलाकात