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शादी से पहले परफेक्ट लुक का क्रेज, वेट लॉस इंजेक्शन और दवाई की बढ़ी डिमांड; डॉक्टरों ने किया अलर्ट

Published: Tue, 03 Nov 2026 04:17 PM (IST)

शादी से पहले 'परफेक्ट लुक' पाने की होड़ में युवा माउंजारो और ओजेम्पिक जैसे वेट-लॉस इंजेक्शन का सहारा ले रहे हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।

शादी से पहले वेट लॉस इंजेक्शन और दवाई की बढ़ी मांग। (फोटो- AI जेनरेटेड)

शादी से पहले वेट लॉस इंजेक्शन और दवाई की बढ़ी मांग। (फोटो- AI जेनरेटेड)

HighLights

  1. शादी से पहले वेट लॉस इंजेक्शन का चलन बढ़ा।

  2. माउंजारो, ओजेम्पिक जैसी दवाओं का हो रहा दुरुपयोग।

  3. डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जोखिमों पर कड़ी चेतावनी दी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शादियों का सीजन आने से पहले का समय अब सिर्फ कपड़े फाइनल करने, वेन्यू बुक करने और जश्न की प्लानिंग करने तक सीमित नहीं रह गया है। अब इस सूची में एक नई और चिंताजनक प्रवृत्ति जुड़ गई है-क्विक वेट लॉस।

शादी के दिन, एल्बम की तस्वीरों और मेहमानों के सामने सबसे स्लिम और आकर्षक दिखने की सामाजिक होड़ में कई युवा माउंजारो, ओजेम्पिक और वेगोवी जैसे प्रिस्क्रिप्शन-आधारित वेट-लॉस इंजेक्शन का सहारा ले रहे हैं।

हफ्तों के अंदर 10 से 15 किलो वजन घटाने की यह जल्दबाजी न केवल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है, बल्कि चिकित्सा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के बीच भी गहरी चिंता का विषय बन गई है।

डॉक्टरों का साफ कहना है कि ये दवाएं कॉस्मेटिक 'क्विक फिक्स' नहीं हैं और किसी शादी की डेडलाइन को पूरा करने के लिए इनका इस्तेमाल सेहत के साथ खिलवाड़ साबित हो सकता है।

क्लीनिकों में बड़ी इंजेक्शन और दवाई की पूछताछ

देशभर के प्रमुख बैरिएट्रिक और वेलनेस क्लीनिकों में पिछले 12 से 18 महीनों का दौरान वजन घटाने वाले इंजेक्शनों को लेकर पूछताछ में दो से तीन गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में यह मांग तेजी से बढ़ रही है।

अस्पतालों और क्लीनिकों के आंकड़ों के मुताबिक, बड़े केंद्रों पर हर महीने 120 से 150 पूछताछ सिर्फ इन इंजेक्शनों को लेकर आ रही है। इनमें से 20 प्रतिशत से ज्यादा पूछताछ उन युवाओं और उनके परिजनों की होती है, जिनकी शादी तय हो चुकी है।

कई वेलनेस सेंटरों ने तो बाकायदा माउंजारो ब्राइड जैसे प्री-वेडिंग ट्रांसफॉर्मेशन पैकेज तक विज्ञापित करने शुरू कर दिए हैं। जहां पहले शादी से पूर्व के पैकेजों में केवल स्किनकेयर, हेयरस्टाइलिंग और ग्रूमिंग होती थी वहीं अब वजन घटाने के इंजेक्शनों को धड़ल्ले से शामिल किया जाने लगा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्लीनिक आने वाले मरीजों में से केवल 40 से 45 प्रतिशत लोग ही इन दवाओं के लिए तय कड़े मेडिकल मानदंडों को पूरा करते हैं। बाकी अधिकांश लोग बिना किसी बीमारी के महज दिखावे और कॉस्मेटिक बदलाव के लिए तुरंत परिणाम चाहते हैं।

रिजेक्शन के डर ने बढ़ाई पूछताछ

शादी से पहले वजन घटाने का यह दबाव सिर्फ खूबसूरत तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध समाज में स्वीकार्यता और विवाह के बाजार में जांच परख से भी है।

मेट्रो शहरों में कई युवतियों ने बताया कि शादी के लिए रिश्ते देखने के दौरान वजन ज्यादा होने के कारण उन्हें बार-बार रिजेक्शन झेलना पड़ा। समाज द्वारा मोटी कहे जाने का डर और हीन भावना कई युवतियों को इन दवाओं की तरफ धकेल रही है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सुंदरता के पारंपरिक और अवास्तिक पैमानों पर खरा उतरने का यह दबाव लोगों को अपने ही शरीर को लेकर अत्यधिक असहज बना रहा है।

जो मौका जीवन के एक नए सफर का खूबसूरत जश्न होना चाहिए, वह निरंतर तुलना, चिंता और आत्म-संदेह का कारण बन जाता है। समाज की आलोचना से बचने के लिए लोग खुद के सबसे कठोर आलोचक बन जाते हैं।

इंजेक्शन बंद करने पर दोबारा वजन बढ़ने का जोखिम

जांच में यह भी सामने आया है कि शादी से ठीक पहले इन इंजेक्शनों की मदद से 10 से 15 किलो वजन घटाने वाले अधिकांश युवक-युवतियां शादी संपन्न होते ही दवाएं लेना बंद कर देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह सबसे खतरनाक स्थिति है।

इन दवाओं को अचानक छोड़ने से घटा हुआ वजन दोबारा तेजी से बढ़ सकता है। तेजी से वजन कम होने की प्रक्रिया में शरीर से फैट के साथ-साथ कुछ मांसपेशियां भी तेजी से घटती हैं, जिससे कमजोरी और न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी हो जाती है।

बिना उचित डॉक्टर की निगरानी के इन दवाओं के इस्तेमाल से लगातार उल्टी, जी मिचलना, दस्त, गंभीर डिहाइड्रेशन और पैन्क्रियाज से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

किन लोगों के लिए हैं ये दवाएं?

माउंजारो और वेगोवी जैसा दवाएं टाइप-2 डायबिटीज और क्रॉनिक ओबेसिटी से पीड़ित उन मरीजों के लिए विकसित की गई हैं जिनका बीएमआई काफी अधिक है और जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या स्लीप एप्निया जैसी गंभीर समस्याएं हैं।

दवा निर्माता कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि ये दवाएं केवल योग्य डॉक्टरों के पर्चे और कड़ी निगरानी में ही ली जानी चाहिए। कंपनियों ने कॉस्मेटिक लक्ष्यों के लिए इनके ऑफ-लेबल इस्तेमाल और बिना डॉक्टर की सलाह के सेल्फ-मेडिकेशन के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है।

नई बीमारियों को दे रहा है जन्म

भारतीय बाजार में इन दवाओं की उपलब्धता के बाद 2030 तक देश में मोटापा-रोधी दवाओं का बाजार 80000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

बाजार का यह विस्तार जहां गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए राहत लेकर आया है, वहीं शादी ब्याह के बाजार में इसका अनियंत्रित और गैर जिम्मेदाराना इस्तेमाल एक नई बीमारियों को जन्म दे रहा है।

डॉक्टरों का क्या है कहना?

शरीर का मेटाबॉलिज्म किसी वेडिंग प्लानर या कैलेंडर की तय की गई डेडलाइन के मुताबिक काम नहीं करता। डॉक्टरों की दो टूक सलाह है कि शादी के कपड़ों में फिट आने के लिए स्वास्थ्य को दांव पर लगाना आत्मघाती हो सकता है।

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