यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 01, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उच्च शिक्षण संस्थानों को फीस न लौटाना पड़ेगा भारी, यूजीसी ने वित्तीय मदद रोकने की दी चेतावनी
दाखिला रद कराने के बाद भी छात्रों की फीस वापस न करना उच्च शिक्षण संस्थानों को अब भारी पड़ेगा। विश्वविद्यालय ...और पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: समय पर दाखिला रद कराने के बाद भी छात्रों की फीस वापस न करना उच्च शिक्षण संस्थानों को अब भारी पड़ेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऐसे संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे फीस वापसी के नियमों को नहीं मानते हैं, तो उनकी संबद्धता छीनी जा सकती है। साथ ही उन्हें मिलने वाली वित्तीय मदद पर भी रोक लगाई जा सकती है।
शिकायतों के बाद यूजीसी ने दी चेतावनी
कई बार शिक्षण संस्थान छात्रों का मूल दस्तावेज नहीं लौटाते हैं। यूजीसी ने इसे भी गंभीरता से लिया है और नामांकन रद कराने पर छात्रों को मूल दस्तावेज लौटाने का निर्देश दिया है। यूजीसी ने फीस वापस नहीं करने को लेकर छात्रों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों को यह चेतावनी दी है। साथ ही यूजीसी ने उन नियमों का हवाला दिया है, जिनके आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे संस्थानों को वित्तीय मदद की पात्रता की सूची से भी हटाया जा सकता है।
छात्रों की फीस वापस करने का है निर्देश
यूजीसी ने कहा कि यदि ऐसे संस्थान समय रहते फीस वापसी की लंबित शिकायतों का निराकरण नहीं करते हैं, तो उन्हें कोई दूसरी सुविधा भी नहीं दी जाएगी। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखे पत्र में कहा है कि अपने स्तर पर इस दिशा में जरूरी कदम उठाएं। फीस वापस करने के लंबित आवेदनों पर तुरंत फैसला लें। बताते चलें कि यूजीसी की ओर से एक निश्चित समय तक दाखिला रद कराने पर छात्रों की फीस वापस करने का निर्देश है। इसे सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को मानना जरूरी है।