फीस न लौटाने वाले कॉलेजों पर UGC सख्त, राज्यपालों से की कड़ी कार्रवाई की मांग
यूजीसी ने प्रवेश रद्द होने के बाद भी छात्रों की फीस न लौटाने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई के लिए राज्यों के राज्यपालों से हस्तक्षेप मांगा है।

यूजीसी ने राज्यपालों से फीस वापसी पर हस्तक्षेप मांगा

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रवेश निरस्त कराने के बाद भी छात्रों की फीस नहीं लौटाने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के रवैए को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मोर्चा खोलते हुए राज्यों के राज्यपालों से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
साथ ही कहा है कि छात्रों के हितों को देखते हुए फीस वापसी नियमों का पालन न करने वाले ऐसे सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जाए। यूजीसी ने इस दौरान ऐसे सभी संस्थानों की सूची छात्रों की बकाया फीस के साथ भी साझा की है।
यूजीसी ने राज्यपालों से फीस वापसी पर हस्तक्षेप मांगा
यूजीसी ने छात्रों की फीस वापसी मामले में यह कदम तब उठाया है, जब उसके बार-बार कहने के बाद भी उच्च शिक्षण संस्थान फीस वापसी के नियमों का पालन नहीं कर रहे है। यूजीसी ने इसे लेकर 2020 में एक गाइडलाइन जारी की थी।
इसमें एक निर्धारित तिथि तक प्रवेश निरस्त कराने पर उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की पूरी फीस वापस करने के निर्देश है। साथ ही उसके बाद भी एक समय तक कुछ हिस्सा काटकर भी उसे लौटाने के निर्देश है।
लेकिन स्देश के बड़ी संख्या में उच्च शिक्षण संस्थान छात्रों की फीस वापस नहीं कर रहे है। ये स्थिति दिल्ली से लेकर देश के सभी राज्यों में मौजूद सरकारी व निजी उच्च शिक्षण संस्थानों की है।
फीस न लौटाने वाले संस्थानों की सूची साझा की
राज्यों के राज्यपाल के प्रमुख सचिव व उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को लिखे गए पत्र में यूजीसी ने छात्रों की फीस वापस न करने वाले राज्यों के ऐसे संस्थानों की सूची भी मुहैया करायी है।
इनमें अकेले उत्तर प्रदेश के 572 मामले है, जबकि दिल्ली के 309, पश्चिम बंगाल के 148, कर्नाटक के 132 और बिहार के 33 मामले शामिल है।
यूजीसी के मुताबिक देश के 29 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे मामले पाए गए है। गौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने की आपाधापी में हर साल बड़ी संख्या में छात्र सीट आरक्षित करने के चक्कर में कई जगहों पर फीस का एक हिस्सा जमा कर देते है।
हालांकि यूजीसी नियमों के तहत निर्धारित समय-सीमा में वह बाकी संस्थानों से प्रवेश निरस्त करा लेते है, लेकिन इसके बाद भी कुछ संस्थान फीस लौटाने में आनाकानी करते है।
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