ट्रंप और चिनफिंग क्रिटिकल मिनरल्स पर करेंगे चर्चा, भारत की पैनी नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग बीजिंग में क्रिटिकल मिनरल्स पर चर्चा करेंगे, जिस पर भारत की गहरी नजर है।

ट्रंप और चिनफिंग क्रिटिकल मिनरल्स पर करेंगे चर्चा। (रॉयटर्स)

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार (14 मई 2026) से बीजिंग में शुरू हो रही दो दिवसीय शिखर वार्ता में क्रिटिकल मिनरल्स (रेयर अर्थ्स सहित) पर चर्चा एजेंडे का अहम हिस्सा होगी।
इस मुद्दे पर भारत की भी गहरी नजर है, क्योंकि अमेरिका व भारत के बीच क्रिटिकल मिनरल्स समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी चल रही है। इससे क्वाड में अमेरिका के अलावा अन्य तीनों देश (जापान, ऑस्ट्रेलिया व भारत) की असहजता भी बढ़ेगी क्योंकि इस संगठन में भी क्रिटिकल मिनिरल्स पर व्यापक सहयोग को लेकर वार्ता हो रही है।
भारत-यूएस क्रिटिकल मिनरल्स एग्रीमेंट
मार्च 2026 में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-यूएस क्रिटिकल मिनरल्स एग्रीमेंट को लेकर कहा था कि यह बहुत ही जल्द होने वाला है। उन्होंने कहा था कि, “अगले कुछ महीनों में बड़ा ऐलान होने वाला है, जो एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी सिस्टम्स और उभरती टेक्नोलॉजीज की सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा।”
जनवरी 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात में भी इस पर विस्तृत चर्चा हुई थी। दोनों देश आइसीईटी, काम्पैक्ट, पैक्स सिलिका फ्रेमवर्क के तहत अफ्रीका-दक्षिण अमेरिका में संयुक्त निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
ऐसे में चीन व अमेरिका के बीच दुर्लभ खनिजों को लेकर क्या एजेंडा तय होता है, इसका असर भारत व अमेरिका के बीच होने वाले भावी समझौते पर भी हो सकता है।
जुलाई 2025 में वाशिंगटन में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में “क्वाड क्रिटिकल मिनिरल्स इनिसिएटिव” की शुरुआत की गई थी। इसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविधीकृत करना, ई-वेस्ट से रिकवरी बढ़ाना और बाजार विरोधी नीतियों से बचाव करना है।
क्वाड देश गुणवत्ता के मानकों को तर्कसंगत बनाने पर कर रहे काम
क्वाड के चारों देश (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) 30-40 निजी कंपनियों के साथ मिलकर निवेश, प्रसंस्करण क्षमता को बेहतर करने, गुणवत्ता के मानकों को तर्कसंगत बनाने पर काम कर रहे हैं। यह पहल स्पष्ट रूप से चीन पर निर्भरता कम करने के लिए है। यहीं वजह है कि अमेरिका की तरफ से चीन के साथ इस क्षेत्र में सहयोग करने को लेकर क्वाड के अन्य देशों के असहज होने की बात सामने आ रही है।
माना जा रहा है कि अमेरिका अपने उद्योग की जरूरत के चलते ऐसा कर रहा है। चीन क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स के क्षेत्र में दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है। वह ग्लोबल रेयर अर्थ्स माइनिंग का 70 फीसद से ज्यादा, इसे प्रोसेसिंग करने में 90 फीसद से ज्यादा और मैग्नेट निर्माण का लगभग 93 फीसद नियंत्रित करता है।
क्रिटकल मिनिरल्स सेमीकंडक्टर, डिफेंस और एआई के लिए महत्वपूर्ण
अंतरराष्ट्रीय इनर्जी एजेंसी (आइईए) की रिपोर्ट ग्लोबल क्रिटकल मिनिरल्स-2025 के अनुसार चीन 19 प्रमुख मिनरल्स में सभी 19 की रिफाइनिंग में 70 फीसद औसत बाजार हिस्सेदारी रखता है। यह इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और एआई जैसी प्रौद्योगिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यहीं वजह है कि अमेरिका अब उसके साथ सहयोग को तत्पर है। हाल ही में (फरवरी, 2026) ट्रंप प्रशान के तत्वाधान में 50 से ज्यादा देशों के साथ चीन-विरोधी सप्लाई चेन विविधीकरण पर बैठक हुई है। इसमें भारत भी शामिल है।
