'एनरिच्ड यूरेनियम पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं', सीजफायर पर बिगड़ी बात तो बोले ईरान के मंत्री
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दावा किया है कि उनके देश के पास 60% संवर्धित यूरेनियम पर भौतिक नियंत्रण नहीं है।
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ईरान ने कहा- एनरिच्ड यूरेनियम पर हमारा कंट्रोल नहीं (जागरण)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि उसके पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित (Enriched) यूरेनियम पर फिलहाल भौतिक नियंत्रण नहीं है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दावा किया कि यह संवर्धित यूरेनियम उन भूमिगत परमाणु ठिकानों में मौजूद है, जिन पर हालिया युद्ध के दौरान बमबारी की गई थी।
गरीबाबादी ने अमेरिका पर 'वार्ता नहीं बल्कि अपनी शर्तें थोपने' का आरोप लगाया और कहा कि तेहरान सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार था, लेकिन वॉशिंगटन केवल अपनी शर्तें मनवाना चाहता था।
'अमेरिका सिर्फ आदेश देना चाहता है'
ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा, 'ईरान सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार था, लेकिन इसके लिए वास्तविक बातचीत जरूरी है। अमेरिका बातचीत नहीं चाहता, वह केवल अपनी शर्तें लागू करना चाहता है।'
गरीबाबादी ने अमेरिका के रवैये को “Negotiation नहीं, Dictation' यानी 'बातचीत नहीं बल्कि आदेश' करार दिया। उनके मुताबिक, अमेरिका-ईरान के बीच हालिया वार्ताओं में तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई।
- ईरान का परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा
- मौजूदा संवर्धित यूरेनियम भंडार का भविष्य
- यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) की सीमा
अमेरिका ने क्या मांगें रखी थीं?
ईरान के अनुसार, अमेरिका ने कई कठोर शर्तें रखीं, जिन्हें ईरान ने खारिज कर दिया।
- 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपा जाए
- ईरान अगले 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन रोक दे
- संवर्धित सामग्री को दूसरे देशों को नहीं बल्कि सीधे अमेरिका को दिया जाए
गरीबाबादी ने सवाल उठाया, 'यूरेनियम अमेरिका को क्यों सौंपा जाए?' अमेरिका के उप विदेश मंत्री ने बताया, 'अमेरिका युद्ध में अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया और अब वह ईरान से रियायतें लेना चाहता है।'
ईरानी मंत्री ने साफ कहा कि तेहरान अपने परमाणु अधिकारों से पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम अपने राष्ट्र को उसके अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते।'
ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम नहीं कर रहा।
'60% यूरेनियम पर हमारा कंट्रोल नहीं'
गरीबाबादी का सबसे बड़ा बयान यह रहा कि जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के पास फिलहाल 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम पर भौतिक नियंत्रण नहीं है। उन्होंने बताया कि यह सामग्री भूमिगत परमाणु सुविधाओं में रखी हुई थी, जिन्हें अमेरिका और इजरायल के हमलों में निशाना बनाया गया।
हालांकि गरीबाबादी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यूरेनियम सुरक्षित है या नहीं। यूरेनियम तक पहुंच संभव है या नहीं और उसका कितना हिस्सा प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान वैश्विक परमाणु सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत को राहत
ग़रीबाबादी ने भारत को मित्र देश बताते हुए कहा कि ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा, 'भारत एक मित्र देश है। हमने 11 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है और कुछ अन्य जहाजों को भी अनुमति देने पर काम कर रहे हैं।'
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी जहाजों को अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जा सकता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों और पारदर्शिता के आधार पर तय किया जाएगा।
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या प्रस्ताव रखा?
ईरान ने अमेरिका के सामने जो प्रस्ताव रखा, उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे, लेकिन अमेरिका ने इन प्रस्तावों को पर्याप्त नहीं माना।
- अमेरिका अपनी नाकाबंदी हटाए
- ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियां लौटाई जाएं
- होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए
- 30 दिनों तक सभी मुद्दों पर बातचीत हो
- ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता दोहराए
दो महीने से जारी संघर्ष का असर
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ युद्ध अब दो महीने से अधिक समय तक खिंच चुका है। हालांकि युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं और तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे।
इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।
'ईरानी जनता के अधिकार स्वीकार करने होंगे'
गरीबाबादी ने अंत में कहा, 'ईरानी जनता के अधिकारों को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।' उन्होंने कहा कि ईरान अपने 14-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर समाधान चाहता है, लेकिन किसी भी दबाव में अपने रणनीतिक अधिकार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
