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आतंकवाद, साइबर स्कैम और मानव तस्करी... जयशंकर ने ईस्ट एशिया समिट में उठाए गंभीर मुद्दे

Published: Thu, 23 Jul 2026 11:20 PM (IST)

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मनीला में 21वें ईस्ट एशिया समिट में आसियान देशों के समक्ष भारत को निशाना बनाने वाले साइबर स्कैम गिरोहों का मुद्दा उठाया।

जयशंकर ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा (फोटो-रॉयटर्स)

जयशंकर ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. जयशंकर ने 21वें ईस्ट एशिया समिट में साइबर स्कैम मुद्दा उठाया।

  2. भारतीयों को निशाना बनाने वाले गिरोहों पर सामूहिक कार्रवाई की मांग।

  3. इंडो-पैसिफिक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आसियान क्षेत्र के कई देशों में भारत को केंद्र में रख कर उपजे साइबर स्कैम गिरोहों का मुद्दा भारत ने गुरूवार को जोरदार तरीके से उठाया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मनीला में आयोजित 21वें ईस्ट एशिया समिट में भाग लेते हुए आजाद, सभी के लिए समान अवसर वाले और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थापना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

जयशंकर ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया

जयशंकर ने क्षेत्रीय स्थिरता, आसियान की केंद्रीय भूमिका और समुद्री सुरक्षा पर बल देते हुए आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया क्योंकि आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

जयशंकर ने कहा कि आज की अनिश्चित और अस्थिर वैश्विक व्यवस्था में आपसी निर्भरता और साझा हित प्रतिस्पर्धा व विरोध के साथ-साथ चल रहे हैं।

विदेश मंत्री ने साइबर स्कैम सेंटरों के खिलाफ गंभीर सामूहिक कार्रवाई की मांग की, जो बड़े पैमाने पर भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

भारत के लिए यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में कंबोडिया, थाईलैंड और म्यांमार में ऐसे स्कैम सेंटर चलाए जाने की सूचनाएं सामने आई हैं। इन गिरोहों में बड़ी संख्या में भारतीयों को नौकरी के लालच में फंसाकर जबरन रखा जाता है और उनसे गैरकानूनी साइबर अपराध कराए जाते हैं।

ये केंद्र न केवल आर्थिक ठगी करते हैं बल्कि मानव तस्करी और जबरन श्रम जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हुए हैं, जिससे भारतीय युवाओं की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ सहयोग की जरूरत उभरकर सामने आती है।

दक्षिण चीन सागर पर जयशंकर ने कहा कि भारत 1982 के यूएनसीएलओएस के अनुरूप एक सारगर्भित, प्रभावी और कानूनी रूप से बाध्यकारी समापन का समर्थन करता है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के वैध अधिकारों को किसी भी रूप में प्रभावित न करे।

विदेश मंत्री ने विश्व अर्थव्यवस्था पर संघर्षों के प्रभाव, ऊर्जा-खाद्य-स्वास्थ्य सुरक्षा, पश्चिम एशिया संघर्ष में संवाद व कूटनीति की अपील, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, म्यांमार में राजनीतिक समाधान और आसियान प्रयासों का समर्थन भी किया।

सनद रहे कि भारत इस साल कोच्चि में 7वें ईएएस समुद्री सुरक्षा सहयोग सम्मेलन और लोथल में ईएएस समुद्री विरासत महोत्सव की मेजबानी करेगा।

जयशंकर ने यूएनआरडब्ल्यूए को भारत के योगदान और दो-राज्य समाधान के जरिए स्थायी शांति की वकालत भी की। समिट में उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक की स्वतंत्रता-खुलापन-समृद्धि पर भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

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