हिरासत में मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SIT गठित कर FIR दर्ज करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने जहीरुद्दीन गयासुद्दीन शेख की हिरासत में कथित मारपीट और मौत के मामले में एसआइटी गठित करने और एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
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पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला (फोटो-पीटीआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत पर एसआइटी बनाई।
जहीरुद्दीन शेख मामले में एफआइआर दर्ज करने का आदेश।
तीन महीने में गुजरात कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जहीरुद्दीन गयासुद्दीन शेख नामक व्यक्ति के साथ हिरासत में कथित मारपीट और मौत के मामले में विशेष जांच दल (एसआइटी) बनाने और एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही गुजरात की अदालत में तीन महीने के अंदर जांच की अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
जहीरुद्दीन के बेटे तौफीक शेख ने गुजरात हाई कोर्ट के 29 मई के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने एफआइआर दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग वाली तौफीक की याचिका खारिज कर दी थी।
पुलिस हिरासत में अप्राकृतिक मौत के मामले में SC का फैसला
शुरुआत में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पुलिस हिरासत में अप्राकृतिक मौत के मामले में शुरुआती जांच जरूरी है। अगर अपराध का इशारा करने वाली कोई सामग्री मिलती है, तो एफआइआर दर्ज की जानी चाहिए।
पीठ एएसजी एसवी राजू की इस दलील से सहमत नहीं थी कि एफआइआर के बजाय शुरुआती जांच होनी चाहिए। एसवी राजू का कहना था कि मजिस्ट्रेट स्तर की जांच चल रही थी और पोस्टमार्टम करने वाले पांच डाक्टरों की टीम को कोई चोट नहीं मिली थी।
दूसरी ओर याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस मामले में आरोपितों को बचा रही थी और मृतक के बेटे को धमकी भी दी जा रही थी।
पीठ ने आदेश दिया, 'हम इस बात से संतुष्ट हैं कि इस चरण में किसी संदिग्ध का नाम लिए बिना एफआइआर दर्ज करने का शुरुआती मामला बनता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रविधानों के तहत दर्ज एफआइआर की जांच डीसीपी रैंक के अधिकारियों और गुजरात के डीजीपी द्वारा नामित दो अधिकारियों वाली एसआइटी करेगी।'
पीठ ने एसआइटी को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के अंदर क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल करे। साथ ही कहा, 'अगर याचिकाकर्ता असंतुष्ट रहता है, तो वह विरोध याचिका दाखिल कर सकता है और आगे की जांच आदि की मांग कर सकता है।'
पीठ ने अहमदाबाद पुलिस आयुक्त से याचिकाकर्ता को कथित तौर पर मिल रही धमकियों की जांच करने और उचित कार्रवाई करने को भी कहा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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