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28 अक्टूबर को आएगा फॉर्म 6 में गड़बड़ी दूर करने का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को दिया भरोसा

Published: Thu, 15 Oct 2026 08:47 AM (IST)Updated: Thu, 15 Oct 2026 08:50 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए नामों की समस्या पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

फॉर्म 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को दिया भरोसा। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)

फॉर्म 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को दिया भरोसा। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को करेगा सुनवाई।

  2. दिल्ली मतदाता सूची से नाम हटाने का मामला।

  3. फॉर्म 6 में घोषणा संबंधी समस्या।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उन मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि वह 28 अक्टूबर को वह इस समस्या पर विचार करेगा, जिनकी शिकायत थी कि दिल्ली की मतदाता सूची से उनके नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। 

दरअसल, इन मतदाताओं से फॉर्म 6 भरने को कहा गया था, जिसमें यह घोषणा करनी होती है कि वे पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा रहे हैं। जब वकील प्रशांत भूषण ने आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की तो मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, "हम एक ऐसा आदेश पारित करने पर विचार कर रहे हैं जिससे इस गड़बड़ी को ठीक किया जा सके।"

28 अक्टूबर को होगी सुनवाई

साथ ही जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, वे खुद को पहली बार मतदाता बनने वाला (फर्स्ट-टाइमर) नहीं कह सकते। पीठ ने अंजलि भारद्वाज की अर्जी को 30 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव दिया।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इस पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के ड्राफ्ट में मौजूद गड़बड़ियों को ठीक करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर तय की है। सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को इस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया।

क्या है मामला?

31 अगस्त को प्रकाशित दिल्ली की मतदाता सूची के मसौदे में बताया गया है कि एसआईआर शुरू होने से पहले सूची में शामिल 1,45,10,299 मतदाताओं में से 97,53,577 ने अपने विवरण फॉर्म जमा किए हैं, जबकि 47,56,722 मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट श्रेणियों के तहत इस मसौदा सूची से हटा दिया गया है।

चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 अक्टूबर कर दी थी। भारद्वाज ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं उन्हें मतदाता सूची में फिर से शामिल करने का एकमात्र तरीका फॉर्म 6 भरना है लेकिन इस फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी पड़ती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहा है, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।

सूची से हटाए गए 47.56 लाख लोगों में से लगभग 32 लाख लोगों को स्थायी रूप से स्थानांतरित माना गया है। भूषण ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया जा सकता है कि जो लोग मतदाता सूची में अपना नाम फिर से जुड़वाना चाहते हैं उन्हें फॉर्म 8 का उपयोग करके आवेदन करने की अनुमति दी जाए या फिर कोई अन्य उचित तरीका अपनाया जाए ताकि उन मौजूदा मतदाताओं के नाम वापस जोड़े या शामिल किए जा सकें, जो ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं।

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