नई दिल्ली (जेएनएन)। किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने आज तमिलानाडु सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि यह सुनकर दुख होता है कि तमिलनाडु के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से कोई उचित कदम नहीं उठाया जा रहा है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि राज्य सरकार किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ रह सकती है।

कोर्ट ने किसानों की आत्महत्या पर चिंता जाहिर करते हुए इसे अमानवीय घटना करार दिया। कोर्ट की ओर से तमिनलाडु सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले में दो हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। दरअसल कोर्ट जानना चाहता हैं कि आखिर राज्य सरकार की ओर से मामले में क्या कदम उठाए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने पहले राज्य सरकार से जवाब चाहती है।

कोर्ट ने मामले किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर सुनवाई के लिए वकील गोपाल सुब्रमण्यम को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। कोर्ट में याचिका तमिलनाडु की संस्था सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से दाखिल की गयी थी। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट की मुदैराई बेंच में भी याचिका दाखिल की गयी थी,जहां मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

बता दें कि पिछले एक महीने से तमिलनाडु के किसान सूखे से राहत देने की मांग को लेकर दिल्ली में धरना दे रहे हैं। किसानों की ओर से अपनी मांगों को लेकर पिछले दिनों  नग्न प्रदर्शन किया गया था। जंतर मंतर पर किसान अपने संगे संबंधियों के नरकंकाल लेकर धरना प्रदर्शन दे रहे हैं।

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Posted By: Kishor Joshi

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