विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चीनी क्यों हुई कड़वी, देश में कितना है स्टॉक? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

By Arvind SharmaEdited By: Garima Singh
Published: Mon, 24 Aug 2026 08:38 PM (GMT+05:30)Updated: Mon, 24 Aug 2026 09:32 PM (GMT+05:30)

चीनी की कीमतों में उछाल का कारण जमाखोरों की सट्टेबाजी वाली खरीद है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी दिखी।

जमाखोरों की सट्टेबाजी वाली खरीद से चीनी के भाव बढ़े

जमाखोरों की सट्टेबाजी वाली खरीद से चीनी के भाव बढ़े

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। चीनी के भाव में उछाल की सबसे बड़ी वजह जमाखोरों और कारोबारियों की सट्टेबाजी वाली खरीद है। गन्ने की फसल पर मौसम, बीमारी और बारिश के असर को देखते हुए कारोबारियों को आगे बाजार में तंगी की आशंका हुई। उन्होंने डेढ़-दो महीने की जरूरत की चीनी पहले ही खरीदकर गोदामों में रोक ली।

इससे देश में पर्याप्त चीनी होने के बावजूद बाजार में उपलब्धता कम दिखी और कीमतें तेजी से बढ़ गईं। हालांकि सरकार की सख्ती और अतिरिक्त आपूर्ति के इंतजाम से अब कीमतों में नरमी के संकेत मिलने लगे हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी और चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने दावा किया है कि सरकार की पहल का असर बाजार में दिखने लगा है।

क्यों बढ़े चीनी के दाम?

जोशी ने कहा है कि देश में पर्याप्त चीनी है। सालाना करीब 280 लाख टन की घरेलू जरूरत के मुकाबले 306 लाख टन चीनी उपलब्ध है। सरकार पर्याप्त स्टाक बाजार में जारी करेगी और जमाखोरी और कृत्रिम तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के अनुसार पेराई सत्र की शुरुआत में ही गन्ने की उपलब्धता, खराब मौसम, रेड राट बीमारी और रिकवरी रेट में बदलाव से उत्पादन के शुरुआती अनुमान पर दबाव दिखने लगा था।

इसके साथ त्योहारी मांग और वैश्विक बाजार में तेजी की खबरों ने कारोबारियों को पहले से खरीद बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इससे बाजार में सट्टेबाजी और तेज हो गई।

क्या कहते हैं आंकड़ें?

शुरुआत में तस्वीर उत्साहजनक थी। कृषि मंत्रालय ने मई के आखिरी सप्ताह में 5000.63 लाख टन गन्ने के रिकार्ड उत्पादन का अनुमान लगाया था, जो पिछले वर्ष के 4546.11 लाख टन से करीब 454.52 लाख टन अधिक था।

इसके बावजूद चीनी उत्पादन का अनुमान गन्ना उत्पादक राज्यों के शुरुआती 343 लाख टन से घटकर करीब 306 लाख टन रह गया। यानी शुरुआती अनुमान से करीब 11 प्रतिशत कम।

इस गिरावट की बड़ी वजह गन्ने की गुणवत्ता और रिकवरी रेट में कमी रही। दो वर्ष पहले राष्ट्रीय औसत रिकवरी करीब 10.10 प्रतिशत थी, जबकि इस बार यह 9.56 प्रतिशत रही।

हालांकि यह 2024-25 के लगभग बराबर थी, लेकिन रेड राट, टाप बोरर और अत्यधिक बारिश से जलभराव ने कई क्षेत्रों में गन्ने की गुणवत्ता को प्रभावित किया। ऐसे में केवल गन्ने के वजन के आधार पर चीनी उत्पादन का अनुमान लगाना जोखिम भरा साबित हुआ।

सरकारी तंत्र के लिए बड़ा सबक

सरकारी तंत्र के लिए यह बड़ा सबक है। रिकार्ड गन्ना उत्पादन का अनुमान आने के बाद पूरे सीजन में खेतों की स्थिति, बीमारी, जलभराव, गन्ने की गुणवत्ता और राज्यवार रिकवरी की लगातार निगरानी जरूरी थी।

कृषि, गन्ना और खाद्य विभाग के आंकड़ों की नियमित समीक्षा होती और बदलती परिस्थितियों के अनुसार उत्पादन अनुमान समय रहते संशोधित किया जाता तो संभावित कमी का संकेत पहले मिल सकता था। इससे स्टाक प्रबंधन और अतिरिक्त आपूर्ति जैसे कदम भी समय रहते उठाए जा सकते थे।

अब आगे क्या?

इस्मा का कहना है कि पेराई सत्र 10-15 दिन पहले शुरू कर देने से अक्टूबर में 10-12 लाख टन चीनी बाजार में आ सकती है, जबकि इस दौरान मांग 24-25 लाख टन रहने का अनुमान है।

मौजूदा स्टाक और आयात के साथ यह आपूर्ति बाजार का दबाव कम कर सकती है। सितंबर के अंत में करीब 35 लाख टन शुरुआती स्टाक बचने की उम्मीद है। यानी देश अगले चीनी वर्ष में भी पर्याप्त भंडार के साथ प्रवेश करेगा।

यह भी पढ़ें- चीनी का उत्पादन घटने पर उठे सवाल, उत्तर प्रदेश में एथेनाल उत्पादन का भी दिख रहा असर

यह भी पढ़ें- चीनी के दाम बढ़े तो महंगी हुई मिठास, पंजाब में बर्फी से जलेबी तक के रेट बढ़े; त्योहार-शादी का बजट भी प्रभावित