प्राइम टीम, नई दिल्ली। सोने की कीमतों में इस साल आई रिकॉर्ड तेजी से तो आप वाकिफ होंगे ही। महज पांच महीनों में सोने के दाम 62 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 72 हजार रुपए हो गए हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि इसी दौरान चांदी के दाम 72 हजार रुपए प्रति किलो से बढ़कर 94 हजार रुपए प्रति किलो हो गए हैं, जो कि सोने की तुलना में 220% ज्यादा रिटर्न है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल चांदी पहली बार एक लाख रुपए प्रति किलो के पार चली जाएगी।

चांदी की कीमतों में तेजी का आलम ये है कि अकेले इस महीने चांदी के दाम 15 हजार रुपए प्रति किलो बढ़ चुके हैं। मुंबई स्थित इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, दो मई को चांदी के दाम 79719 रुपए प्रति किलो थे, जो 29 मई को बढ़कर 94118 रुपए प्रति किलो हो गए।

एचडीएफसी सिक्युरिटीज के कमोडिटी रिसर्च हेड अनुज गुप्ता कहते हैं, सितंबर में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती संभावना के कारण हाल के सप्ताहों में चांदी में मजबूत तेजी देखी गई है। इसके अलावा, बीते कुछ समय से औद्योगिक धातुओं की कीमत ठहरी हुई थीं, जिनमें अब तेजी वापस लौटी है, क्योंकि दुनियाभर में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुधार हुआ है। इसने भी चांदी की कीमतों में तेजी लाने में योगदान दिया है।

गुप्ता ने कहा, सिल्वर इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में ग्रीन एनर्जी का चलन बढ़ने से चांदी की औद्योगिक मांग में वृद्धि हो रही है। सिल्वर इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि चांदी की ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएगी, जिससे चांदी की डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर आ जाएगा। इससे भी चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा।

गुप्ता ने कहा कि हमारा मानना है कि चांदी में अन्य एसेट क्लास से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है। चूंकि चांदी के लिए दीर्घकालिक बुनियादी बातें सकारात्मक हैं, इसलिए ग्लोबल डिमांड इसकी सप्लाई से ज्यादा रहने की उम्मीद है।

हालांकि, चांदी की कीमत में मई महीने में आई उछाल का मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नवनीत दमानी कहते हैं, शंघाई ने रियल एस्टेट को सपोर्ट करने के लिए डाउन-पेमेंट की आवश्यकता और न्यूनतम मॉर्टगेज दरों में कमी की है। इज़राइल और मिस्र के बीच गोलीबारी के बारे में भी अपडेट थे। ऐसी भी खबरें आईं कि उत्तर कोरिया ने जापान पर मिसाइलें दागी हैं, साथ ही ताइवान की सीमा के पास चीन के प्रशिक्षण अभ्यास में वृद्धि हुई है। भू-राजनीतिक तनाव के बारे में ये अपडेट सोने और चांदी दोनों के लिए सुरक्षित आश्रय की अपील को बढ़ा रहे हैं।

जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के पूर्व चेयरमैन कॉलिन शाह कहते हैं, चांदी का सजावटी मूल्य होने के साथ एक औद्योगिक मूल्य भी है। चांदी सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों, और 5जी एंटीना के साथ-साथ अन्य उत्पादों में एक अनिवार्य कच्चा माल है। ये सनराइज सेक्टर हैं। इसलिए चांदी की मांग में भी तेजी बनी रहेगी।

शाह कहते हैं कि इसके अलावा, भू-राजनीतिक संकट, आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई की ऊंची दर, ब्याज दरों में कटौती की संभावना पिछले कुछ दिनों से चांदी की कीमतों को बढ़ावा दे रही हैं।

गुप्ता ने कहा कि चांदी में तेजी का रुझान जारी रहने की उम्मीद है। निवेशक और ट्रेडर चांदी में निवेश कर सकते हैं और जिनका पहले से निवेश है वह इसमें बने रह सकते हैं। अनुज गुप्ता ट्रेडिंग में स्टॉपलॉस लगाने की सलाह देते हुए कहते हैं कि छोटी अवधि में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है, इसलिए स्टॉपलॉस लगाना बेहतर होगा। गुप्ता ने कहा कि लांग टर्म में चांदी 1,10,000 रुपए के पार जा सकती है।

कॉलिन शाह भी गुप्ता से इत्तेफाक रखते हुए कहते हैं कि चांदी में रैली जारी रहने की उम्मीद है। इस साल के अंत तक चांदी 1 लाख रुपए के पार जा सकती है। हालांकि, दमानी का मानना है कि चांदी की कीमतों में तेजी आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाक्रमाें पर निर्भर करेगी।

वर्मा ज्वैलर्स, विवेक विहार के प्रमुख नितिन वर्मा कहते हैं कि चूंकि चांदी की डिमांड इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में है, जिससे इसका सीधा संबंध इकोनॉमी से है। इसका मतलब है कि इकोनॉमी स्ट्रांग होने और आर्थिक गतिविधियां चरम पर होने से चांदी की कीमत बढ़ जाती है।

इस साल दुनिया में चांदी की मांग 1.2 अरब औंस पहुंच जाने का अनुमान है। ऐसे में अगर इस साल वैश्विक इकोनॉमी की हालत ठीक रहती है तो चांदी की कीमत में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतें अभी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी दूर है।