नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्‍तान सरकार और वहां की मीडिया का एक और शर्मनाक चेहरा सामने आया है। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। पाक मीडिया का आलम तो ये है कि पाकिस्‍तान के अखबार 'द नेशन' ने इस हमले को 'फ्रीडम फाइटर' द्वारा किया गया हमला बताया है। वहीं 'द डाउन' ने इसको लेकर एक छोटी सी खबर को प्रकाशित किया है। इसको लेकर जहां भारत के लोगों में जबरदस्‍त गुस्‍सा दिखाई दे रहा है वहीं पाकिस्‍तान ने इसको लेकर भारत के आरोपों को खारिज कर दिया है।

इमरान ने नहीं की निंदा
आलम ये है कि पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जो भारत के साथ दोस्‍ती बनाए रखने का राग अलापते दिखाई देते हैं, ने हमले को लेकर कोई अफसोस तक जाहिर नहीं किया है। इतना ही नहीं इस हमले में संवेदना तक जताने के लिए पाकिस्‍तान सरकार का कोई मंत्री तक सामने नहीं आया। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता की तरफ से एक ट्वीट कर इसकी खानापूर्ति का काम जरूर कर दिया गया। अपने एक ट्वीट में विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता डॉक्‍टर मोहम्‍मद फैजल ने घटना की निंदा की है और भारत के उन आरोपों को खारिज किया है जिसमें भारत ने इसके लिए पाकिस्‍तान को जिम्‍मेदार ठहराया था। प्रवक्‍ता का कहना है कि इसमें पाकिस्‍तान का कोई हाथ नहीं है।

जैश पर बार-बार उठाई हैं अुगली  
आपको यहां पर बता दें कि पाकिस्‍तान की मीडिया ने इस बारे में जो खबर दी है उसमें इस हमले की जिम्‍मेदारी लेने वाले जैश ए मोहम्‍मद का जिक्र किया है। यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि जैश ए मोहम्‍मद को लेकर भारत काफी समय से पाकिस्‍तान पर अंगुली उठाता रहा है। भारत बार-बार कहता रहा है कि पाकिस्‍तान जैश समेत दूसरे संगठनों के आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा है। इसका जिक्र भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर भी किया है। सितंबर 2016 में जब आतंकियों ने उरी के आर्मी कैंप पर हमला किया था उसके बाद भारत ने सर्जिकल स्‍ट्राइक के जरिए जवानों के खून का बदला लिया था। एक बार फिर से भारत की जनता के अंदर यही भावना फिर उठ रही है। आपको बता दें कि जवानों पर किया ये हमला आज तक का यह सबसे बड़ा हमला है।

जब जैश के चीफ मसूद अजहर को छोड़ा था
इमरान खान की जहां तक बात है तो वह बार-बार भारत से दोस्‍ती की बात करते आए हैं। वह कई मोर्चों पर इस बात को कहते सुने गए हैं कि भारत को पुरानी बातों को भुलाकर बातचीत के लिए टेबल पर आना चाहिए। पिछले वर्ष उन्‍होंने सत्‍ता संभालने के बाद यहां तक कहा था कि दाउद इब्राहिम, हाफिज सईद और मसूद अजहर उन्‍हें विरासत में मिले हैं। लेकिन इसके बाद भी पाकिस्‍तान की सरकार ने इन सभी पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की। इतना ही नहीं जिस आतंकी संगठन जैश ए मोहम्‍मद ने इस हमले की जिम्‍मेदारी ली है उसका हैडक्‍वार्टर पाकिस्‍तान के रावलपिंडी में है और इसका प्रमुख मसूद अजहर है। यह वही आतंकी है जिसको 1999 में उसके दो अन्‍य साथियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के बंधकों को छुड़ाने के एवज में रिहा किया था। 

ये है मसूद अजहर
अजहर का जहां तक जिक्र है तो 1993 में वह नेरौबी और केन्‍या में मौजूद आतंकी संगठनों के नेताओं से मिला था। इसके अलावा अलकायदा नेटवर्क से भी उसने मुलाकात की थी। इसका मकसद अपने संगठन के लिए पैसा और आतंकियों की तैनाती थी। भारतीय खुफिया एजेंसी ने इसको लेकर इनपुट दिया था कि उसने यहां की करीब तीन बार यात्रा की थी। अपने आतंकी संगठन के लिए उसने ब्रिटेन तक की यात्रा की थी। 1994 में अजहर श्रीनगर भी आया था। इसके बाद उसको भारत ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। 1995 में उसके संगठन ने उसको छुड़ाने के मकसद से जम्‍मू कश्‍मीर में छह विदेशियों को अगवा कर लिया था। लेकिन भारत उनकी मांगों पर नहीं झुका था। इनमें से एक बंधक बचकर भाग निकलने में कामयाब रहा था जबकि एक की लाश बाद में बरामद की गई थी। वहीं अन्‍यों का आजतक कुछ पता नहीं चला। इसके चार वर्ष बाद 1999 में उसको इंडियन एयरलाइंस के बंधकों के एवज में रिहा किया गया था। इसके अलावा जमात उद दावा का चीफ हाफिज सईद खुलेआम भारत के खिलाफ आग उगलता दिखाई देता है। वर्ष 2016 में भारत की पहल पर उसका ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट डिलीट कर दिया था।

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Posted By: Kamal Verma

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