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मतांतरण के मामलों को हाई कोर्ट से स्थानांतरित करने की याचिका पर SC ने केंद्र और छह राज्यों से मांगा जवाब

मुस्लिम संगठन ने गुजरात झारखंड और हिमाचल प्रदेश की उच्च न्यायालय में लंबित तीन- तीन याचिकाओं इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पांच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में छह और कर्नाटक उच्च न्यायालय में लंबित एक याचिका को स्थानांतरित करने की मांग की है। (जागरण-फोटो)

By AgencyEdited By: Ashisha Singh RajputPublished: Fri, 03 Feb 2023 08:02 PM (IST)Updated: Fri, 03 Feb 2023 08:02 PM (IST)
पीठ ने कहा, 'याचिकाओं में नोटिस जारी करें, जिनमें स्थानांतरण याचिका सहित अब तक कोई नोटिस जारी नहीं हुआ।'

नई दिल्ली, पीटीआई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक मुस्लिम संगठन द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और छह राज्यों से जवाब मांगा है। इस याचिका में अंतर-धार्मिक विवाह के कारण मतांतरण को विनियमित करने वाले राज्यों के कानूनों को चुनौती देने वाले 21 मामलों को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई है।

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याचिका पर नोटिस जारी

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर नोटिस जारी किया। बता दें कि यह याचिका अधिवक्ता एमआर शमशाद के माध्यम से याचिका दायर की गई और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि को जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया।

मुस्लिम संगठन की मांग

आपको बता दें कि मुस्लिम संगठन ने गुजरात, झारखंड और हिमाचल प्रदेश की उच्च न्यायालय में लंबित तीन- तीन याचिकाओं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पांच, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में छह और कर्नाटक उच्च न्यायालय में लंबित एक याचिका को स्थानांतरित करने की मांग की है, जिनमें संबंधित राज्यों के कानूनों को चुनौती दी गई है।

क्या कहा पीठ ने

पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'इन याचिकाओं में नोटिस जारी करें, जिनमें स्थानांतरण याचिका सहित अब तक कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।' अदालत याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन दलीलों को भी शामिल किया गया है, जिनमें प्रलोभन या बल प्रयोग से कथित धर्म परिवर्तन पर सवाल उठाए गए हैं और इसके साथ ही राज्यों के धर्मांतरण रोधी कानूनों की वैधता को चुनौती दी गई है।

दो अलग-अलग याचिकाएं दायर

यही नहीं इसके अलावा, इसके अलावा, गुजरात और मध्य प्रदेश द्वारा दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में संबंधित उच्च न्यायालयों के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई है। इन आदेशों के तहत धर्मांतरण पर राज्यों के कानूनों के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी गई थी।

एक पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता का बयान

अदालत में एक पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि अश्विनी उपाध्याय ने न केवल अतिरिक्त हलफनामे में, बल्कि रिट याचिकाओं में भी आपत्तिजनक दलीलें दी हैं। वहीं अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि पिछली सुनवाई में कई पक्षों ने अतिरिक्त हलफनामे में दी गई दलीलों पर आपत्ति जताई थी और इसलिए वह इसे वापस ले रहे हैं।

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