विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राहुल गांधी की सांसदी बहाली के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, याचिकाकर्ता पर लगा 1 लाख का जुर्माना

Published: Fri, 19 Jan 2024 02:36 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने तुच्छ याचिकाएं दायर करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा ...और पढ़ें

राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल करने वाली अधिसूचना को रद्द करने की मांग वाली याचिका की खारिज
राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल करने वाली अधिसूचना को रद्द करने की मांग वाली याचिका की खारिज

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को "तुच्छ" याचिकाएं दायर करने पर कड़ा रुख अपनाया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल करने वाली 7 अगस्त, 2023 की अधिसूचना को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया।

लोकसभा अधिसूचना ने राहुल गांधी की 'मोदी' उपनाम वाली टिप्पणी पर 2019 के मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने के शीर्ष अदालत के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल कर दी।

SC ने लगा दी थी सजा पर रोक

शीर्ष अदालत ने 4 अगस्त, 2023 को मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। गांधी संसद के निचले सदन में वायनाड का प्रतिनिधित्व करते हैं। लखनऊ स्थित अशोक पांडे द्वारा दायर याचिका न्यायमूर्ति बी आर गवई और संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।

पीठ ने पाया कि मामले की सुनवाई के लिए दो बार बुलाए जाने के बावजूद पांडे उनके समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इसमें याचिकाकर्ता द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर अदालत द्वारा पारित दो पिछले आदेशों का भी हवाला दिया गया। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने उन याचिकाओं को क्रमशः 5 लाख रुपये और 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया था।

ऐसी याचिकाओं से खराब होता है समय- SC

याचिका को खारिज करते हुए और जुर्माना लगाते हुए पीठ ने कहा, ऐसी तुच्छ याचिकाएं दाखिल करने से न केवल अदालत का बल्कि पूरी रजिस्ट्री का कीमती समय बर्बाद होता है...। याचिकाकर्ता ने याचिका में लोकसभा अध्यक्ष, भारत सरकार, चुनाव आयोग और राहुल गांधी को प्रतिवादी बनाया था।

पीठ ने यह भी देखा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा उसकी पिछली याचिका के समान था, जिसे पिछले साल अक्टूबर में 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया गया था। अक्टूबर में खारिज की गई याचिका में याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता की बहाली को चुनौती दी थी।

पिछले साल, शीर्ष अदालत ने एक अलग जनहित याचिका में यह दावा करने के लिए याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था कि बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा ली गई शपथ "दोषपूर्ण" थी।

पिछले साल राहुल गांधी हुए थे अयोग्य घोषित

गांधी को पिछले साल 24 मार्च को एक सांसद के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था जब गुजरात की एक अदालत ने उन्हें मोदी उपनाम के बारे में की गई टिप्पणियों के लिए आपराधिक मानहानि के लिए दोषी ठहराया और दो साल की कैद की सजा सुनाई थी।

बाद में गुजरात उच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि "राजनीति में शुद्धता" समय की जरूरत है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी।

भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने 2019 में गांधी के खिलाफ उनके "सभी चोरों का सामान्य उपनाम मोदी कैसे है?" पर आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया था। 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की गई थी।

यह भी पढ़ें- Bilkis Bano केस के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 21 जनवरी तक करना होगा सरेंडर

यह भी पढ़ें- 'टेंट में रामलला के दर्शन करने की दशकों पुरानी पीड़ा दूर हो रही', सोलापुर की जनसभा में बोले पीएम मोदी