'धार्मिक परंपराएं रहें बरकरार, पर न हो श्रद्धालुओं का शोषण'; बांके बिहारी मंदिर में भीड़ नियंत्रण के लिए SC ने दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई ...और पढ़ें

बांके बिहारी मंदिर में भीड़ नियंत्रण के लिए SC ने दिए निर्देश।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर पर चिंता जताई।
यूपी सरकार को समग्र विकास योजना बनाने का निर्देश।
भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर जोर।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और वहां पहुंचने के संकरे रास्ते और सुविधाओं के अभाव को ध्यान में रखते हुए मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह मंदिर के आसपास सुविधाओं के विकास के लिए समग्र विकास योजना बनाए और कोर्ट में पेश करे, कोर्ट उस पर विचार करेगा।
कहा योजना में सड़कों के चौड़ीकरण, अस्पताल, श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल, पीने के पानी व अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ ही बुजुर्गों, दिव्यांग, महिलाओं व बच्चों के मंदिर तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन आदि की सुविधाएं शामिल हों। इसके साथ ही कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर का प्रशासन देख रही उच्च स्तरीय कमेटी से कहा है कि मंदिर की धार्मिक परंपराएं बरकरार रहें लेकिन उनमें कोई अनियमितता या श्रद्धालुओं का शोषण नहीं होना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने ये भी कहा है कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं के बारे में गोस्वामी सेवायत सुझाव देंगे और कमेटी उस पर विचार करेगी।
भीड़ प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए- सुप्रीम कोर्ट
साथ ही कहा है कि मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए उच्चस्तरीय कमेटी आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके अपनाए जैसे कि श्रद्धालुओं को अलग अलग समूह में दर्शन के लिए भेजा जाए और एक समूह के वापस आने पर दूसरे को भेजा जाए। ये निर्देश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने बांके बिहारी मंदिर में व्यवस्था को लेकर गोस्वामियों द्वारा दाखिल अर्जियों पर सुनवाई में दिए।
कोर्ट ने उच्च स्तरीय समिति में गोस्वामियों के प्रतिनिधियों को शामिल करने के बारे में गोस्वामी अर्जीकर्ताओं की ओर से उठाई गई आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए शयन भोग और राज भोग के गोस्वामियों के दो समूहों में प्रत्येक में दो- दो प्रतिनिधि गोस्वामियों की पसंद के शामिल कर दिये हैं।
मंदिर के समय पर भी विचार किया जाएगा विचार
शयन भोग में शैलेन्द्र गोस्वामी और रजत गोस्वामी तथा राज भोग में गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी को नामित किया है। ये प्रतिनिधि उच्च स्तरीय कमेटी में गोस्वामियों के प्रतिनिधि होंगे और मंदिर की धार्मिक परंपराओं और सुधारों के बारे में कमेटी को सुझाव देंगे जिस पर कमेटी विचार करेगी। इसमें मंदिर के समय पर भी विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और संकरे रास्ते व सुविधाओं के अभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को मंदिर परिसर के अंदर और आसपास के सामाजिक और नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए आगे आना चाहिए। इन सुविधाओं के लिए सड़कों को चौड़ा करने, मंदिर के अंदर और आसपास व्यावसायिक गतिविधियों को विनियमित करने और भक्तों के लिए सुविधाओं के साथ साथ निवासियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान करने हेतु जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता होगी।
प्रदेश सरकार को पहले एक योजना तैयार करनी होगी
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एएसजी केएम नटराज ने कहा कि इसके लिए प्रदेश सरकार को पहले एक योजना तैयार करनी होगी। पीठ ने कहा कि इसमें होटल, धर्मशालाएं, पेयजल सुविधाएं, शौचालय, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग अलग सुविधाएं, आपातकालीन निकास द्वार, सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं और वरिष्ठ नागरिकों, बीमार व्यक्तियों, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन शामिल होंगे।
पूरे क्षेत्र के विकास के लिए एक विशिष्ट विकास योजना तैयार की जानी चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह एक समग्र विकास योजना तैयार करके कोर्ट में पेश करे। कोर्ट उस पर विचार करेगा। इससे पहले गोस्वामियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान, व अन्य वकीलों ने मंदिर की धार्मिक परंपराओं और मंदिर के समय में बदलाव के कमेटी के निर्णय का विरोध किया।
इस मंदिर की परंपराएं अन्य मंदिरों से अलग
कहा कि देहरी पूजन जहां सदियों से हो रहा था उसे बंद करके दूसरी जगह कर दिया है। मंदिर का समय भी बदल दिया गया है। उनका कहना था कि यहां भगवान जीवंत बाल भगवान हैं और उनकी उसी रूप में पूजा की जाती है इसके अलावा उन्हें लीला करने वाला भगवान माना जाता है इसलिए इस मंदिर की परंपराएं अन्य मंदिरों से अलग हैं।
यहां माना जाता है कि भगवान रात में निधि वन लीला करने जाते हैं इसलिए सुबह आराम करते हैं यहां सुबह मंगला आरती नहीं होती। भगवान को विश्राम का समय मिलना चाहिए।
कमेटी की ओर से पेश एएसजी नटराज ने कहा कि मंदिर का समय और अन्य बदलाव भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए किये गए हैं। देहरी पूजन भी दूसरी जगह हो रही है। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक परंपराएं बरकरार रहनी चाहिए। भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तरीकों के बारे में सोचना चाहिए। लीक से हट कर सोचने की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान गोस्वामियों ने फूल बंगला सेवा करने की इजाजत मांगी और कहा कि इसके लिए उनसे एक लाख रुपये की भारी भरकम राशि चुकाने की शर्त न रखी जाए। बांके बिहारी के लाइव दर्शन स्ट्रीमिंग को लेकर भी सवाल उठाए।
