विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 27, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नशे में डूबी जिंदगी बचाने के लिए लौटे स्वदेश

By Srishti VermaEdited By:
Published: Mon, 27 Nov 2017 09:17 AM (IST)

हजारों लोगों को नशे से बाहर निकाल चुके हैं डॉ. सुभाष नागपाल, बिहार के मुख्यमंत्री कर चुके हैं सम्मानित...

नशे में डूबी जिंदगी बचाने के लिए लौटे स्वदेश
नशे में डूबी जिंदगी बचाने के लिए लौटे स्वदेश

सिलीगुड़ी (अशोक झा)। मदर टेरेसा की कर्मभूमि पश्चिम बंगाल से संबंध रखने वाले आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. सुभाष नागपाल बिहार, सिक्किम, उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र में नशे में डूबे लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल, बांग्लादेश के भी युवकों को नशे की लत से दूर करने वाले डॉ. नागपाल की स्वस्थ समाज की परिकल्पना धरातल पर रंग ला रही है। उनकी बदौलत देश ही नहीं विदेश में नशे के लती नया जीवन जी रहे हैं। नागपाल कनाडा से स्वदेश आकर इस काम में छह महीने गुजारते हैं। डॉ. सुभाष नागपाल का नाम नशे की लत से परेशान परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अभी तक वह करीब 25 हजार से अधिक लोगों को (ज्यादातर युवा) नशे की लत से छुटकारा दिला चुके हैं।

करते हैं मुफ्त इलाज और काउंसिलिंग : डॉ.नागपाल के कदम महीने के 20 दिन उन स्थानों पर पड़ते हैं, जहां स्वस्थ समाज की सरकारी पहल दूर-दूर तक नहीं होती है। वहां वह मुफ्त इलाज व काउंसिलिंग कर लोगों को नशामुक्त जीवन की प्रेरणा देते हैं। डॉ. नागपाल ने 1987 से यह मुहिम छेड़ रखी है। इनके इस कार्य के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व तत्कालीन नगालैंड के राज्यपाल देवानंद कुंवर भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। डॉ. नागपाल असम में भी मुफ्त इलाज देने गए, जहां सामूहिक हिंसा में कई लोगों की मौत हुई। वह वर्षों से उदालगुड़ी, जामुनगुड़ी, बोकाजान, विश्वनाथ चार्ली, मेघालय के तुरा, शिलांग, नगालैंड, दार्जिलिंग के विभिन्न क्षेत्रों, सिक्किम के रिनांक व पाकिंग में काम कर रहे हैं। इसमें उन्हें मां कल्याणी वेलफेयर सोसाइटी का पूरा सहयोग मिलता है। दुबई के नैयर अहसान व मोजम अली के नेतृत्व में बिहार, झारखंड इंटरनेशनल फोरम के सहयोग से बिहार के ठाकुरगंज, बहादुरगंज, कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, सिवान आदि में शिविर लगा कर नशा मुक्ति की अलख जगा चुके हैं। सीमा पार नेपाल के काकरभीट्ठा धुलाबाड़ी तथा बांग्लादेश के चटगांव में भी वह अपने चिकित्सा शिविर के माध्यम से सैकड़ों लोगों को जिंदगी बचाने का काम कर चुके हैं।

राजस्थान के गंगानगर में छह जून 1956 में जन्मे सुभाष नागपाल ने अपनी शिक्षा यहीं पूरी की। इसी बीच वह रोलर स्केटिंग भारतीय टीम के कप्तान बने। उन्होंने 1988 में रोलर स्केटिंग करते हुए दिल्ली से काठमांडू का दौरा किया। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को नशे का लती पाया। इसके अलावा 50 की उम्र के लोगों को गठिया दर्द से कराहते देखा। उनकी पीड़ा नागपाल के मन को छू गई। सरकारी नौकरी की जगह जनसेवा का भाव यहीं से जागा। वह स्वस्थ समाज का संकल्प लेकर अपने मिशन पर निकल पड़े। परिवार में इसका विरोध भी हुआ पर वह नहीं माने। गांव के ही वैद्य रामेश्वर के सानिध्य में वह इस पैथी से जुड़ते गए। फिर कोलकाता से 1985 में आयुर्वेद व यूनानी पद्धति से इलाज की डिग्री प्राप्त की।

फिर चर्चा में डॉ. नागपाल : डॉ. नागपाल इन दिनों फिर चर्चा में है। उन्हें 2016 में कनाडा की नागरिकता मिल गई। वह पत्नी सुमन तथा दोनों पुत्र अर्जुन व तरंगित नागपाल के साथ कनाडा चले गए। वहां जाकर उन्हें स्वदेश की याद सताने लगी। उन्होंने फैसला किया है कि वह साल के छह महीने भारत में लोगों की सेवा करेंगे और बाकी वक्त कनाडा में बिताएंगे।

यह भी पढ़ें : नशा मुक्ति से ही बनेगा स्वस्थ समाज