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नदी बेसिन वाले भारतीय शहरों में दूरस्थ भूकंप भी बढ़ा सकते हैं खतरा, दिल्ली-यूपी-बिहार के कई शहर संवेदनशील

Published: Sun, 21 Jun 2026 08:49 PM (IST)

नदियों के किनारे बसे भारतीय शहरों को दूरस्थ भूकंपों से भी गंभीर खतरा है, क्योंकि गहरे तलछटी बेसिन भूकंपीय तरंगों को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

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HighLights

  1. गहरे तलछटी बेसिन भूकंपीय तरंगों की तीव्रता बढ़ाते हैं।

  2. दिल्ली-एनसीआर, गंगा-यमुना के मैदानी शहर अति संवेदनशील।

  3. विस्तृत माइक्रोजोनेशन और सख्त निर्माण नियम आवश्यक।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में बढ़ती आबादी के चलते नदियों के किनारे बसावट गंभीर होती जा रही है। ऐसे में नदियों के किनारे और तलछटी बेसिन में बसे भारतीय शहरों के लिए दूरस्थ भूकंप भी गंभीर खतरा बन सकते हैं।

नए अध्ययन में पाया गया है कि धरती की सतह के नीचे मौजूद गहरे तलछटी बेसिन भूकंपीय तरंगों को रोककर उन्हें बार-बार परावर्तित कर सकते हैं। इससे कंपन की तीव्रता कई गुना बढ़ जाती है और भूकंप का केंद्र दूर होने पर भी शहरों में भारी नुकसान की आशंका रहती है।

दिल्ली-एनसीआर, गंगा-यमुना के मैदानी शहर अति संवेदनशील

भारत के संदर्भ में यह निष्कर्ष दिल्ली-एनसीआर, गंगा-यमुना के मैदानी शहरों, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा हिमालय की तलहटी में बसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए अहम है।

इन इलाकों में बड़ी आबादी नदी तटों और मुलायम जलोढ़ मिट्टी वाले मैदानों में रहती है। ऐसी मिट्टी कठोर चट्टानों की तुलना में भूकंपीय तरंगों को धीमा करती है, लेकिन उनकी ऊर्जा बढ़ा सकती है।

न्यूजीलैंड के वेलिंगटन बेसिन पर किए गए अध्ययन में विज्ञानियों ने पाया कि बेसिन की गहराई और किनारों की बनावट के कारण जमीन का क्षैतिज कंपन सामान्य स्तर से 2.5 से तीन गुना तक बढ़ सकता है।

2016 के काइकौरा भूकंप में केंद्र से करीब 80 किलोमीटर दूर वेलिंगटन के कई बहुमंजिला भवनों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था। विज्ञानियों के अनुसार, भारत में केवल भूकंप संभावित क्षेत्रों की सामान्य श्रेणी तय करना पर्याप्त नहीं है।

शहरों के भीतर तलछटी बेसिन, नदी किनारे की जमीन, भरी हुई भूमि और कमजोर मिट्टी वाले हिस्सों का विस्तृत भूकंपीय माइक्रोजोनेशन जरूरी है।

इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी शहर के कौन से इलाके तेज झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर जैसे तेजी से फैलते शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण नियमों का सख्ती से पालन, पुराने भवनों की भूकंपरोधी मजबूती और मेट्रो, पुल, अस्पताल, बिजली तथा जलापूर्ति जैसे महत्वपूर्ण ढांचे की विशेष सुरक्षा जरूरी है।

अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि भूकंप का खतरा केवल सक्रिय फाल्ट के पास के शहरों तक सीमित नहीं है।

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