असम में सड़क पार करते दिखे दुर्लभ कछुए, सूचना मिलते ही पहुंची वन विभाग की टीम
असम के तिनसुकिया जिले में स्थानीय लोगों और वन विभाग ने दो दुर्लभ कछुओं को बचाया।
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तिनसुकिया में दो दुर्लभ कछुओं को बचाया गया।
HighLights
तिनसुकिया में दो दुर्लभ कछुओं को बचाया गया।
वन विभाग और स्थानीय लोगों ने मिलकर किया रेस्क्यू।
मंत्री ने वन्यजीव सुरक्षा हेतु सतर्कता की अपील की।
डिजिटल डेस्क, गुवाहटी। असम के तिनसुकिया जिले में स्थानीय लोगों और वन विभाग ने दो दुर्लभ कछुओं को बचाया। शुक्रवार को पर्यावरण और वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने मामले की जानकारी दी।
सड़क पर घूमता दिखा था दुर्लभ कछुआ
मंत्री बरुआ ने एक्स पर एक पोस्ट करके मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में डिगबोई-टिंगराई-डूमडूमा सड़क पर एक दुर्लभ कछुआ घूमता देखा गया, जिसे स्थानीय लोगों ने डूमडूमा वन विभाग की मदद से सुरक्षित बचा लिया।
मंत्री ने बताया कि यह कछुआ टिंगराई और डूमडूमा को जोड़ने वाली सड़क पर घूम रहा था और इसके तेज वाहनों की चपेट में आने का खतरा था, खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों ने कछुए को वन विभाग को सौंप दिया।
रैदांग गांव में मिला था एक और कछुआ
इससे एक दिन पहले रैदांग गांव में एक छोटा इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल मिला था। यह छोटा कछुआ एक घर के पास देखा गया और सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था। तभी वन विभाग के कर्मचारियों ने कछुए का रेस्क्यू किया।
सावधानी से बचाई जा सकती है जान
मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा,'ये घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि वन्यजीव अक्सर इंसानी बस्तियों वाले इलाके से गुजरते हैं, जहां सड़के, बस्तियां और वाहन इन जानवरों के लिए खतरा बन सकते हैं। समय रहते सतर्क होने और सावधानी से बचाव कार्य करने से किसी जानवर की जान बचाई जा सकती है।'
मंत्री ने लोगों से की अपील
मंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा, 'हम लोगों से अपील करते हैं कि जब भी वह सड़कों या घरों के आस-पास किसी वन्यजीव को देखें, तो सतर्क रहें। कृपया किसी अनजान जंगली जानवर को नुकसान न पहुंचाएं, न ही उसे पकड़ें। इसके बदले वन विभाग को सूचित करें, ताकि प्रशिक्षित कर्मचारी सुरक्षित तरीके से वहां पहुंचकर मदद कर सकें।'
बरुआ ने कहा कि वन विभाग का मिशन हमेशा यही रहा है वन्यजीवों की रक्षा करना, उन्हें बचाना और हर जीव को जीवित रहने का मौका देना।
असम की समृद्ध जैव विविधता का हिस्सा
कछुए, पक्षी, सरीसृप और अन्य कम दिखाई देने वाले जीव असम की समृद्ध जैव विविधता का अहम हिस्सा हैं। हर बचाव कार्य इस प्राकृतिक विरासत को बचाने और स्थानीय समुदायों तथा वन्यजीव संरक्षण टीमों के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक मौका होता है।
