नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भले ही प्रियंका गांधी अपने पिता की हत्यारिन नलिनी से चेन्नई की वेल्लूर जेल में मिलने गई हों या फिर उनके परिवार ने उससे सहानुभूति जताई हो, लेकिन कांग्रेस की अगुआई वाली संप्रग सरकार नलिनी सहित किसी भी हत्यारे को रिहा करने के पक्ष में नहीं है। केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सातों हत्यारों की रिहाई के राज्य सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट केंद्र की इस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। उधर, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी कोर्ट में सरकार की चुनौती का सामना करने की तैयारी कर ली है।

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गत 18 फरवरी को राजीव गांधी के तीन हत्यारों मुरुगन, सान्थन और पेरारिवलम की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी थी। साथ ही कहा था कि उम्रकैद की यह सजा सरकार को कानून में मिले माफी देने के अधिकार के अधीन होगी। इस फैसले के दूसरे ही दिन तमिलनाडु की जयललिता सरकार ने 23 साल से जेल में बंद सातों हत्यारों की रिहाई का एलान कर दिया था। इसके खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

सोमवार को केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा ने मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र करते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की। लूथरा ने कहा कि राज्य सरकार ने गत 19 फरवरी को पत्र भेजकर रिहाई पर केंद्र का नजरिया पूछा है। गत 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की रिहाई पर तो यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था लेकिन बाकी के चार दोषियों जयकुमार, राबर्ट पायस, पी रविचंद्रन और एस नलिनी की रिहाई पर रोक लगाने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि इन चारों के मामले उनके समक्ष नहीं है। इनके लिए सरकार अलग से अर्जी दाखिल करे। इसलिए सरकार ने यह नई याचिका दाखिल की है, जिसमें सातों दोषियों की रिहाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। पीठ ने मामले पर गुरुवार को सुनवाई की मंजूरी दे दी।

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केंद्र ने याचिका में तमिलनाडु सरकार को रिहाई से रोके जाने की मांग करते हुए कहा गया है कि दोषियों का जुर्म किसी माफी के काबिल नहीं है। उन्होंने जघन्य अपराध किया है। उन्होंने न सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री को मानव बम से उड़ाया है बल्कि इस विस्फोट में कई अन्य लोगों की भी जानें गई थीं।

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