जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बीते पूरे साल वसूली करने के बाद चुनावी साल में रेलवे को मुसाफिरों की याद आई है। रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने महाप्रबंधकों (जीएम) और मुख्य प्रचालन प्रबंधकों (सीओएम) से कहा है कि देश का आम आदमी रेल से सफर करता है। लिहाजा किरायों में बढ़ोतरी के बाद यदि हम उसे न्यूनतम सहूलियत देने में भी नाकाम रहे तो वह हमें कभी माफ नहीं करेगा।

वर्ष 2013 में पवन बंसल के रेल बजट के साथ ही रेल किरायों और शुल्कों में बढ़ोतरी का जो अभियान चला था, वह तकरीबन पूरे साल निर्बाध गति से जारी रहा। इस दौरान किराये-भाड़ों में सीधी वृद्धि तो हुई ही, परोक्ष बढ़ोतरी से भी गुरेज नहीं किया गया। खाना भी महंगा हो गया। लेकिन, नहीं सुधरी तो रेलवे की हालत। सेवाओं का स्तर पहले जैसा ही रहा, जबकि खाने की गुणवत्ता और खराब हो गई। न स्टेशनों में साफ-सफाई नजर आई और न ही रिजर्वेशन की हालत में कोई सुधार दिखाई दिया। उलटे भ्रष्टाचार और घोटालों ने रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड तक को चपेट में ले लिया। यहां तक कि सीबीआइ को रेलवे रिजर्वेशन में गड़बड़ी की जांच करनी पड़ रही है।

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इस परिप्रेक्ष्य में रेल मंत्री खड़गे के आगे नया साल नई चुनौतियां लेकर आया है। चुनावी वर्ष में उन्हें न केवल संप्रग सरकार की छूटती ट्रेन को रोकना है, बल्कि उस पर कांग्रेस के भागते वोटरों को भी बिठाना है। यह तभी संभव है जब ट्रेन आकर्षक और सुविधा संपन्न होने के साथ-साथ सुरक्षित व साफ-सुधरी हो। स्टेशन का व्यवस्थित होना भी जरूरी है ताकि भीड़ के कारण कुचलने का खतरा न हो। इसके अलावा यदि ट्रेन में खाना-पानी भी बढि़या हो तो 'अन्य ट्रेनों' के यात्रियों को भी कांग्रेसी ट्रेन की ओर खींचा जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार खड़गे ने सभी महाप्रबंधकों और मुख्य प्रचालन प्रबंधकों के साथ बैठक में परोक्ष संदेश दिया कि अब शुद्ध रूप से यात्री सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए। यानी जितनी कमाई होनी थी हो चुकी, अब और बढ़ोतरी बिलकुल नहीं। अब एकमात्र लक्ष्य कांग्रेस की लड़खड़ाती ट्रेन को संभावित दुर्घटना से बचाने का होना चाहिए। लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले सरकार आम बजट की जगह लेखानुदान ही पेश कर सकेगी। ऐसे में बहुत वादे करना संभव नहीं होगा। लिहाजा वृद्धियों से त्रस्त यात्रियों को तत्काल बेहतर सहूलियतें देकर ही संतुष्ट किया जा सकता है। इसमें भी जनरल और स्लीपर क्लास में चलने वाले आम आदमी का खास ख्याल रखना होगा। उन्होंने कहा, कोहरे के दौरान एक भी हादसा हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा। कोहरे में ट्रेनें लेट होना स्वाभाविक है, लेकिन यात्रियों को यदि असुविधा हुई तो वे अपना गुस्सा कहीं न कहीं अवश्य उतारेंगे।

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