दीवाली से पहले प्रदूषण पर लगाम की तैयारी, ईंट भट्ठों का ईंधन बनेगी पराली, इन राज्यों को मिले निर्देश
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सक्रिय हैं।
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ईंट भट्ठों को 1 नवंबर से पराली जलाने का निर्देश

समय कम है?
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दीपावली के आस-पास बड़े पैमाने पर पराली जलने की पिछले सालों की घटनाओं को देखते हुए इस बार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग दोनों ही पहले से ही सतर्क है। साथ ही इसे लेकर जरूरी उपाय करने में जुटे हुए है।
इसी कड़ी में आयोग ने पंजाब और हरियाणा में संचालित होने वाले सभी ईंट भट्ठों को एक नवंबर से अपनी कुल ईंधन खपत में से अनिवार्य रूप से 30 प्रतिशत तक पराली जलाने के निर्देश दिए है। मौजूदा समय में दोनों राज्यों में करीब पांच हजार ईंट भट्ठे संचालित हो रहे है।
ईंट भट्ठों को 1 नवंबर से पराली जलाने का निर्देश
आयोग की इस पहल दोनों ही राज्यों में अब तक खेतों में जलने वाली पराली के ईंट के भट्ठों तक पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। आयोग ने इसके प्रभावी अमल के लिए दोनों ही राज्यों में विशेष टीमें तैनात करने भी निर्देश दिए है। वहीं इसकी तैयारियों को जांचने के लिए आयोग के चेयरमैन राजेश वर्मा और सचिव तरुण पिथोडे 22 अक्टूबर को पंजाब का दौरा भी करेंगे।
जहां वह राज्य के मुख्य सचिव के साथ बैठक करेंगे। इससे पहले आयोग ने बुधवार को दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ बढ़ने वाले प्रदूषण पर रोकथाम को लेकर बैठक की है। इसमें सड़कों से उठने वाली धूल, वाहन, निर्माण व उद्योगों से होने वाले प्रदूषण आदि पर भी निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।
टीमें निगरानी के लिए राज्यों का दौरा करेंगी
आयोग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक पराली जलाए जाने को लेकर यह सतर्कता इसलिए भी दिखाई जा रही है क्योंकि दीपावली के आसपास दिल्ली में होने वाले प्रदूषण के साथ पंजाब, हरियाणा में जलने वाले पराली का धुंआ भी आकर स्थिति को गंभीर बना देता है।
पिछले कुछ सालों से ऐसी ही स्थिति देखने को मिलती है। इसके साथ ही दोनों ही राज्यों में आने वाले दिनों में फसल की कताई और बुलाई तेज होने से इसकी आशंका भी जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पराली जलने के मामले बढ़ सकते है। वैसे तो हरियाणा में अब तक करीब 30 प्रतिशत तक फसल की कटाई हो चुकी है।
