जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। 2015 के आखिर में अपने सालभर के कामकाज की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य का खाका भी खींच दिया है। रविवार को अपने रेडियो संबोधन 'मन की बात' में उन्होंने लोगों से स्वच्छता अभियान समेत दूसरी योजनाओं से जुड़ने की अपील की। लगभग 20 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्ट अप-स्टैंड अप कार्यक्रम का पूरा खाका 16 जनवरी को जारी कर दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि वैसे तो इस समय सरकार कई सामाजिक और आर्थिक योजनाएं चला रही है, लेकिन जनता को खुद इसमें जुटना होगा। इसके लिए मोदी ने अनोखा रास्ता अपनाया है। उन्होंने 26 जनवरी से पहले लोगों से 'कर्तव्य' पर लेख लिखकर अपने सुझाव समेत माईगाव.कॉम पर भेजने को कहा है। परोक्ष रूप से उन्होंने संदेश दे दिया कि सरकार तो अपना काम कर रही है, लेकिन जनता के भी कर्तव्य होते हैं। ध्यान रहे कि एक तरफ जहां बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है, वहीं विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को है। इस लिहाज से मोदी ने युवाओं को भी जगाया और उनसे नरेंद्र मोदी एप पर युवा उत्सव के लिए सुझाव मांगे। दरअसल सरकार चाहती है कि जनता सीधे जुड़े।

सरकार की समीक्षा

स्वच्छता पहले साल से ही मोदी सरकार की प्राथमिकता रही है। अपने संदेश में मध्य प्रदेश के एक बुजुर्ग कारीगर दिलीप सिंह का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि वह अपना मुफ्त श्रमदान कर सौ लोगों के लिए शौचालय बना चुके हैं। यही लगन देश और समाज को आगे बढ़ाती है। एक प्रकार से सरकार की उपलब्धियों का वर्णन करते हुए मोदी ने वैश्विक फलक पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, व्यापार और व्यवसाय के लिए मुद्रा बैंक, कौशल विकास और रोजगार के लिए अवसर, 1000 दिन के अंदर हर गांव में बिजली पहुंचाने जैसे उन कार्यक्रमों का उल्लेख किया जो जीवन के हर पहलू से जुड़े हैं। अपने भाषण में दो लोगों का उल्लेख कर प्रधानमंत्री ने यह याद दिलाने की कोशिश की कि सरकारी योजनाएं तभी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच पाएगी जब सहभागिता बढ़ेगी।

स्टार्ट अप इंडिया

मोदी ने 'स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया' की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का संकल्प भी दिखाया। इसकी घोषणा उन्होंने 15 अगस्त को लालकिले से की थी। मोदी ने कहा कि 16 जनवरी, 2016 को इसकी पूरी कार्ययोजना जारी की जाएगी। देश को स्टार्ट अप कैपिटल बनाने की कोशिश होगी। आइआइटी, आइआइएम, केंद्रीय विश्वविद्यालय और एनआइटी को भी इससे जोड़ा जाएगा। सोच में बदलाव के जरिये हर क्षेत्र में बदलाव लाने की कोशिश होगी।

अक्षम लोगों को दिव्यांग कहें

मोदी ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए नया शब्द दिव्यांग दिया है। पीएम ने गुजरात के आंखों से अक्षम शिक्षक का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने दो हजार बच्चों को जागरूक बनाया है कि वह किस तरह अक्षम लोगों की मदद कर सकते हैं। उनसे प्रभावित मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों में शरीर के कुछ हिस्से में कमी रहती है। लेकिन उनके पास कुछ दिव्य शक्ति भी होती है, जिसके बल पर वह अद्भुत काम करते हैं। लिहाजा उन्हें दिव्यांग कहा जाना चाहिए।

मुझे बहुत अच्छा लगाः दिलीप सिंह

मन की बात में स्वच्छता के लिए पीएम ने मध्यप्रदेश के दिलिप सिंह मालविया का नाम लिया। जिन्होंने गांव में बिना पैसा लिए 100 से अधिक शौचालय का निर्माण किया। इस पर दिलिप सिंह ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने जो शाबाशी दिया, उससे मैं बहुत खुश हूं, मुझे बहुत अच्छा लगा।

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Posted By: anand raj