पीएम मोदी ने सनाए ताकाइची को बताया अपनी छोटी बहन, भारत-जापान के बीच किन-किन मुद्दों पर हुई डील?
भारत और जापान के 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और पीएम ताकाइची ने एआई, रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक ...और पढ़ें

भारत-जापान संबंधों में आया मोड़ (फोटो-पीटीआई)
HighLights
एआई, रक्षा, ऊर्जा में सहयोग के नए युग की शुरुआत।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त बनाने पर विशेष जोर।
आर्थिक सुरक्षा और निवेश साझेदारी को मजबूत किया गया।
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पिछले दो दशकों से भारत और जापान की सरकारें आपसी संबंधों को शनै-शनै जिस दिशा में ले जा रही थी, उसकी पूरी साफ तस्वीर अब दिखने लगी है।
पीएम नरेंद्र मोदी और पीएम सनाए ताकाइची की अध्यक्षता में 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में जो फैसले लिए गए हैं वो बताते हैं कि पारंपरिक व नई आर्थिकी, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा व रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों के नये युग की शुरुआत हो रही है।
दोनों नेताओं ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि जिस तरह से वैश्विक व्यवस्था में बदलाव आ रहा है उसे देखते हुए भारत व जापान को और करीब लाया जाएगा।
पीएम मोदी हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक दूसरे की अहमियत को रेखांकित किया है जबकि पीएम ताकाइची ने तो इस क्षेत्र को भारत को जापान के लिए अपरिहार्य बताया है। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, समृद्ध और नियम-आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
पीएम मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री को बताया छोटी बहन
जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। बैठक के बाद पीएम मोदी ने अपने संबोधन 'मेरी छोटी बहन प्रधानमंत्री ताकाइची जी' कह कर किया, जिसका ताकाइची ने सहमति में सिर हिला कर सहमति दी।
बाद में पीएम ताकाइची ने बताया कि पिछली बार पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान ही दोनों के बीच भाई-बहन रिश्ते के आधार पर भारत व जापान संबंधों को आगे बढ़ाना है।
पीएम मोदी ने कहा कि, 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, समृद्ध और नियम-आधारित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि, हम अपनी विशेष रणनीतिक व वैश्विक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। आज भारत और जापान दोनों ही विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और एक मुक्त, संपन्न व कानून सम्मत हिंद प्रशांत क्षेत्र हमारी साझा प्राथमिकता है। हमने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इनसे हम मिलकर पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेंगे।'
पीएम ताकाइची ने कहा कि, 'जापान व भारत के नौ सेना जहाज संयुक्त अभ्यास करने की योजना बना रहे हैं। हम हिंद महासागर में अभ्यास बढ़ाएंगे, नौसेना रखरखाव, मरम्मत और सहयोग को बढ़ावा देंगे व मेक इन इंडिया ढांचे के तहत उपकरण सहयोग मजबूत करेंगे।
इस सहयोग को गहरा करने के लिए संबंधित विभागों को चर्चा करने और वर्ष के अंत से पहले अगला जापान-भारत टू प्लस टू (रक्षा व विदेश मंत्रियों) बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया है।'
बाद में दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन व्यवस्था एक संयुक्त रोडमैप की घोषणा की। इसके तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटेरियल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
जापान ने भारत की पेट्रोलियम भंडारण प्रणाली को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय संवाद शुरू करने और भारत को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) की सदस्यता का समर्थन करने की घोषणा की। साथ ही पावर एशिया इनिशिएटिव के तहत आर्थिक सुरक्षा सहयोग के लिए संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा एआई सहयोग पर संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया गया है। भारतीय एआई इकोसिस्टम के प्रमुख संस्थानों ने जापानी साझेदारों के साथ समझौते किए।
उद्देश्य यह है कि जापान की प्रौद्योगिकी व भारत की साफ्टवेयर क्षमता को मिला कर वैश्विक एआइ विकास को नई गति दी जाए। रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग को नई दिशा मिली और भारत-जापान का पहला सह-विकास प्रोजेक्ट (नौसेना रेडियो एंटीना) पर समझौता किया।
यह परियोजना रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में नया अध्याय खोलेगी और क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा तथा नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करेगी।
एक समझौता ऊर्जा सुरक्षा को लेकर है। इस बारे में संयुक्त बयान जारी किया है। इससे इंडिया-जापान बायो-गैस इनिशिएटिव के तहत भारत में 1,000 बायो-गैस और ऑर्गेनिक खाद प्लांट लगाने में सहायता मिलेगी। बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
ताकाइची ने मध्य पूर्व स्थिति से प्रभावित ऊर्जा सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
भारत-जापान निवेश साझेदारी को और मजबूत करने की भी घोषणा की गई है। पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच 120 औद्योगिक समझौते हुए हैं जिसके भारत में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की राह खुली है।
इसी क्रम में नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क तैयार किया गया है जिससे नये उद्योगों की जरूरत के हिसाब से भारतीय प्रतिभाओं को जापान में अवसर मिलेगा।
पीएम मोदी और पीएम ताकाइची की अध्यक्षता में 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में फैसले
- आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त रोडमैपः सेमीकंडक्टर, क्वांटम, एडवांस्ट मेटेरियल्स में आपूर्ति बढ़ाने पर सहयोग
- एआई सहयोग पर संयुक्त वक्तव्यः भारतीय व जापानी साझेदार के बीच प्रौद्योगिकी व साफ्टवेयर का संगम
- रक्षा क्षेत्र में पहला सह-विकास प्रोजेक्टः नौसेना रेडियो एंटीना बनाएंगे, रक्षा उपकरण प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण आसानी से होगा
- ऊर्जा सुरक्षाः क्रूज तेल के आयात, संरक्षण, खरीद में सहयोग बढ़ेगा, भारत में एक हजार बायो गैस प्लांट लगाएगा जापान
- नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिपः शिप-बिल्डिंग, एविएशन जैसे क्षेत्रों में जापान में मिलेगा रोजगार
- निवेशः अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन का निवेश, जापानी कंपनियों को दोगुना करने का लक्ष्य
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