अंतरिक्ष में भारत रचेगा नया इतिहास, पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 जल्द भरेगा उड़ान
भारत का पहला निजी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट विक्रम-1, जिसे स्काईरूट एयरोस्पेस ने विकसित किया है, 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट भरेगा।

निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 जल्द भरेगा उड़ान
HighLights
स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट जल्द होगा लॉन्च।
यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट है।
मिशन आगमन 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और नई उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने गुरुवार को घोषणा की है कि देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट, विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल की पहली टेस्ट फ्लाइट 12 जुलाई से चार अगस्त के बीच होगी।
यह तारीख सतीश धवन स्पेस सेंटर में लॉन्च साइट पर असेंबली और टेस्टिंग का काम पूरे होने और मौसम पर निर्भर करेगा। इसे मिशन आगमन नाम दिया गया है।
विक्रम-1 जल्द भरेगा उड़ान
विक्रम-1 सात मंजिल जितना ऊंचा और कई चरणों वाला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। इसे कार्बन कंपोजिट स्ट्रक्चर से बनाया गया है और कंपनी के अपने बनाए प्रोपल्शन सिस्टम से चलता है। इसे 350 किलो तक वजन वाले छोटे सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
विक्रम-1 का पहला मिशन 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60-डिग्री ऑर्बिटल इन्क्लिनेशन वाली कक्षा (ऑर्बिट) को लक्षित करेगा। ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट एक शक्तिशाली प्रक्षेपण यान होता है, जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को पार कर किसी पेलोड को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होता है।
यह उड़ान भारत में किसी निजी कंपनी द्वारा बनाए गए ऐसे रॉकेट की कक्षा तक पहुंचने की पहली कोशिश होगी।
स्काईरूट एयरोस्पेस के को-फाउंडर और सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा, 'इस मिशन का मकसद यह समझना है कि रॉकेट असल उड़ान की स्थितियों में कैसा काम करता है। जिस पल विक्रम-1 उड़ान भरेगा, भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग एक ऐसी सीमा पार कर लेगा जिसे उसने पहले कभी पार नहीं किया है।'
(समाचार एजेंसी आइएएनएस के इनपुट के साथ)
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