नई दिल्‍ली, आनलाइन डेस्‍क। केंद्रीय जांच एजेंसियों ने देशभर में फैले पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) के नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है। एनआइए और ईडी ने बुधवार को आधी रात से विशेष आपरेशन के तहत 15 राज्यों में फैले पीएफआइ के 93 ठिकानों पर छापेमारी की। समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस छापेमारी में संदिग्‍ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरणों के साथ नकदी जब्त की है। इसके साथ 100 से ज्‍यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आइए इस रिपोर्ट में जानें कि पीएफआइ देश में अपनी जड़ें कैसे मजबूत कर रहा है। इस सवाल का जवाब भी कि क्‍या पीएफआइ पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। 

अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी

अधिकारियों ने आतंकी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के सिलसिले में PFI के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ा जांच प्रक्रिया करार दिया है। अधिकारियों ने जांच के बाद पीएफआई पर प्रतिबंध की संभावना जताई है। अधिकारियों का कहना है कि पीएफआई सदस्‍यों की निर्मम हत्याओं से आम लोगों के मन में आतंकवाद का गहरा प्रभाव पड़ा है।

केंद्र सरकार दे चुकी है संकेत

केंद्र सरकार भी पीएफआइ पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दे चुकी है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट कहती है कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि पीएफआई के कई पदाधिकारी सिमी से जुड़े पाए गए हैं। यही वजह है कि सरकार भी पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया में है। सनद रहे सिमी पहले से ही एक प्रतिबंध‍ित संगठन है।

एनआइए भी कर चुकी है मांग 

समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक एनआईए ने साल 2017 में ही केंद्र सरकार से पीएफआई के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते बैन लगाए जाने की मांग की थी। एनआइए ने इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भी सौंपी थी।

क्‍या पीएफआइ पर लगेगा बैन 

झारखंड समेत कई राज्यों में पहले ही पीएफआइ को अवैध घोषित किया जा चुका है। समय समय पर कई राज्यों की ओर से इस पर बैन लगाने की मांग की जाती रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या केंद्र सरकार पीएफआइ को प्रतिबंधित करने का कदम उठाएगी।

ऐसे बनी आपरेशन की रणनीति

समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट कहती है कि हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ एक हाईलेवल बैठक की थी जिसमें अजीत डोभाल और केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला भी मौजूद थे। सूत्रों का कहना है कि इसी बैठक में पीएफआइ के खिलाफ एक बड़े आपरेशन की रणनीति बनी थी। खुद गृह मंत्री अमित शाह आपरेशन की समीक्षा कर रहे थे।

बेहद गहरी हैं पीएफआइ की जड़ें

PFI एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है। इसका गठन अयोध्‍या में विवादित ढांचे के विध्वंस के एक साल बाद साल 1993 में किया गया था। पीएफआई को कथित तौर पर खाड़ी देशों से ज्‍यादातर धन मिलता है। अधिकारियों का कहना है कि केरल में पीएफआइ की जड़ें बेहद गहरी हैं। सबसे ज्‍यादा गिरफ्तारियां भी केरल में ही हुई हैं। ताजा छापेमारियों के दौरान केरल में 22 लोगों को पकड़ा गया है। महाराष्‍ट्र और कर्नाटक में भी पीएफआइ खूब फलफूल रहा है। केंद्रीय एजेंसियों की ताजा कार्रवाई में महाराष्ट्र और कर्नाटक में 20-20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। केरल, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र और तमिलनाडु के अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम और मणिपुर समेत दो दर्जन से अधिक राज्यों में कई शाखाएं हैं।

(एजेंसियों के इनपुट पर आधारित Explainer) 

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Edited By: Krishna Bihari Singh